« »

कोई क़सम देकर बुला लो खुदाया बहारों को…..

2 votes, average: 5.00 out of 52 votes, average: 5.00 out of 52 votes, average: 5.00 out of 52 votes, average: 5.00 out of 52 votes, average: 5.00 out of 5
Loading...
Uncategorized

जागता रहता हूँ के नींद आ जाये सितारों को
कोई एक आसरा तो चाहिए उन बेसहारों को
 
गुलों के हसीं आरिज़ों पर शबनम के कतरे (आरिजों-गाल)
रो रोकर किया सुर्ख़ रात ने उनके रुखसारों को

बिछड़े जो मौजों की रवानगी के साथ कभी
पा न सके फिर वो कभी दरिया के किनारों को

दिल की ज़मीं पर बोये हैं मैंने खुशियों के बूटे
कोई क़सम देकर बुला लो खुदाया बहारों को

चुभती हैं निगाहों में मौसम की रंगीनियाँ 
जी में आता है लगा दें आग इन नज़रों को 

आने का वादा उसने किया  तो  है शकील मगर 
एक मुद्दत से पहचानता हूँ   उनके इन इशारों को

2 Comments

  1. Jaspal Kaur says:

    अपने विचार बहुत खूबसूरती से लिखे हैं. पढ़ कर बहुत अच्छा लगा.

  2. kusum (pooja) says:

    दिल की ज़मीं पर बोये हैं मैंने खुशियों के बूटे
    कोई क़सम देकर बुला लो खुदाया बहारों को

    इतनी गहरायी कैसे आ सकती है किसीकी बातो में…
    लाजवाब …बहुत खूब…!!!

Leave a Reply