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मेरे खुदा

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Hindi Poetry
मेरे खुदा

ए मेरे खुदा, तुझसे कैसे हुई ये खता.
मैं तेरा नाम ले रही थी,
जब तूने मुझे बहकाया.
कियूँ मुझे बहकाया,
तुझे जरा भी तरस ने आया.

मैं एक-एक सीडी,
रूहानी की चढ़ रही थी.
जब खिसकाई तूने ये सीडी,
मैं तेरा ही नाम जप रही थी.

तूने ना मुझे सम्बला,
जब मैं गिर रही थी,
कियूँ ना मुझे सम्बला,
जब मैं बेकरार हो रही थी.

मैं डूबी थी तेरे ख्यालों में,
जब बहका था मन मेरा.
डूबे-डूबे तेरे ख्यालों में,
ना जाने कब तू खिसका
और वो मन में समाया.

ए मेरे खुदा, तुझसे कैसे हुई ये खता.
जसपाल कौर 3/11/10       11:00a.m.

9 Comments

  1. Dr. Manoj Bharat says:

    shikayat me ibadat ka ye aapka andaj anokha hai.

    Bahut badhai

  2. siddha Nath Singh says:

    nazaqat bhara andaaz magar shabd galat roop me likhe jayn to achchha nahin lagta, sambala nahi sambhala, kiyun nahin kyun,seedi nahin seedhee. aur roohani nahin roohaniyat. dhyan den.

    • Jaspal Kaur says:

      @siddha Nath Singh,
      आपका बहुत बहुत धन्यवाद जो गलतियाँ बातें. जल्दी ही ठीक कर लुंगी. लेकिन सीडी से मतलब steps से है मेरा.

  3. Harish Chandra Lohumi says:

    रचना अच्छी लगी लेकिन अच्छी रचना पर शब्ददोष अच्छा नहीं लगा !

  4. dr.paliwal says:

    Rachna achchhi hai….. kuch corrections hai SNS ji ne kahe mutabik kar lijiye to padhne me aur maja aayega……
    Badhai…..

  5. renukakkar says:

    it is different 🙂

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