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आधुनिक

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Hindi Poetry

 

हमें पूरा भरोसा होता है

अपनी सिद्धता का

यानि अपने ज्ञान और अनुभव का

परन्तु जल्दी ही

टूटने होने लगता है वह

हमारे अपने छोटों के ही सामने

फिर वे समझने लगतेंहैं

खुद को समझदार

परन्तु जल्दी ही टूट जाता है

उन का भी भ्रम

और वे सिद्ध या अनुभवी ही

हो जाते हैं पुराने

यानि आउट डेटिड

अर्थात बीते जमाने के

जो नही है अब आधुनिक या माडर्न ||

 

12 Comments

  1. rajiv srivastava says:

    har cheek ek din outdated ho jati hai–poorabni jati hai aur nai aati hai–aachi rachna badahai

  2. santosh bhauwala says:

    आधुनिक या modern होना आज की सोसाइटी का माप दंड हो गया है
    ख़ास कर , युवा वर्ग की अकड़ भी उसी में हैI

    • dr.ved vyathit says:

      @santosh bhauwala, संतोष जी इस में युवा वर्ग का कोई कसूर या दोष नही है वे भी धीरे २ आधुनिक नही रहेंगे
      भुत २ हार्दिक आभार स्वीकार करें

  3. manojbharat says:

    jiwan ki niranterta ka khub chitran kiya hai aapne. Pathak ko lagata hai ki vah bhi aapki rachna-yatra men kahin na kahin sahyatri hai,

    Bahut Bahut badhai.

  4. Jaspal Kaur says:

    बहुत खूब. चक्र ऐसे ही चलता है. जो कल हमारे लिए नया था आज हमारे बच्चों के लिए पुराना हो गया है.

    • dr.ved vyathit says:

      @Jaspal Kaur, हाँ जीवन का यही कर्म तो जीवन की गति है
      आप का हार्दिक आभार

  5. siddha Nath Singh says:

    samay bada balwan batohi samay bada balwan
    vismriti me ho lop antat: har gyani ka gyan.
    achchhi kavita.

  6. dr.paliwal says:

    Bahut Achchi kavita hai……

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