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नया पुराना

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Hindi Poetry

नया पुराना

 

 

जिन्हें फिर से तोड़ेंगी

आने वाली पीढियां वे सोचते हैं

हम ने तोड़ दीं रूढ़ियाँ

और बना दिया नये नियम

उत्तम और सर्वोत्तम

परन्तु यह सोचना

बड़ी भूल है हमारी

क्यों कि

यही नियम ही तो बनेंगे

रूढ़ियाँ

और यही नियम बन जायेंगे

पुरानी परम्पराएं

पुरानी और दकियानूसी कह कर ||

 

14 Comments

  1. rajiv srivastava says:

    bahut hi satya,bahut hi uttam ,aur lekhni ke kya kahne–badahai sweekaren

  2. manojbharat says:

    Dr.Ved Vyathit ji,

    Vah-Vah Dr. Sahib, Mujhe lagta hai ki Yah rachna Kisi na kisi roop men meri rachna “VIDROH ” KI poorak rachna hai.

    Bahut man ko bhayi,
    Bahut bahut badhai.

  3. sushil sarna says:

    एक अर्थपूर्ण रचना अपने में वर्तमान,भूत और भविष्य की सिमटी सोच को साकार करती-बधाई डॉ. साहिब

    • dr.ved vyathit says:

      @sushil sarna, यह सब आप जैसे भाइयों का प्यार है
      स्नेह बनाये रखिये
      हार्दिक आभार

  4. SARALA says:

    Kafi arthapurna hai- Parampara aur samaj ke bareme
    tipni ki hai Koi Hazare aur bakhi lokgoko samajaye .
    sarala

    • dr.ved vyathit says:

      @SARALA, सरला जी आप ने मेरी रचना को इतना प्यार दिया हार्दिक आभर स्वीकार करें

  5. santosh bhauwala says:

    बहुत खूब!! कल, आज और कल का यथार्थ चित्रण

    • dr.ved vyathit says:

      @santosh bhauwala, संतोष जी आप का मेरी रचन को प्यार निरंतर मिल रहा है
      कृपया हार्दिक आभार स्वीकार करें

  6. Jaspal Kaur says:

    बहुत अच्छी रचना.

    • dr.ved vyathit says:

      @Jaspal Kaur, यह सब आप का मेरी रचना को मिला स्नेह है
      हार्दिक आभार स्वीकार करें

  7. siddha Nath Singh says:

    sundar prastuti.

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