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गर्मी हाइकू !

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Hindi Poetry

गर्मी हाइकू

 

लो गर्मी आई

बह रहा पसीना

आफ़त  लाई

 

कूलर चला

चल रहा है ऐ सी

मिली राहत

 

बिजली गुल

दोहरी आफ़त है

कोई बचाओ

 

आइसक्रीम

लो ठंडा शरबत

प्यास बुझाओ

 

बाहर जाना

खूब पानी पीकर

अक्लमंदी है

 

बहा पसीना

चिप चिप करता

खुजली होती

 

सड़के खाली

पानी वालो की चाँदी

खूब कमाई

 

पियाऊ खोलो

प्यासे को पानी दे दो

पुन: मिलेगा

 

छुट्टियाँ है

खूब मस्ती करना

पढ़ना भी है

 

 

डॉक्टर राजीव श्री वास्तवा

 

5 Comments

  1. Mahender Singh Nayak says:

    राजीव जी

    कविता पढ़ते पढ़ते मन पुलकित हो गया . गर्मी से राहत मिली . सुदर रचना के लिए बधाई .

  2. manojbharat says:

    चित्र चयन भाव अनुरूप तथा विषय चयन ऋतु अनुरूप.

    बहुत सुन्दर….

  3. Harish Chandra Lohumi says:

    बहुत अच्छे हाइकू ! बिलकुल उबले हुए से ! बधाई !
    यह लो छाता,
    बन गए मुश्किल,
    सूरज दादा.

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