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शायद वह कुछ रोया होगा .

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Crowned Poem, Hindi Poetry

समय अभी कुछ ठहरा ठहरा.
मन पर ख़ामोशी का पहरा .
उमड़ घुमड़ कर आते बादल.
नभ भी ढकता उनसे आंचल.
इखरी-बिखरी मन-माला में,
यादों का तार पिरोया होगा ,
शायद वह कुछ रोया होगा .

तेज कदम कुछ सिमटे सिमटे ,
शब्द जुबाँ से अटके भटके ,
नवल बसंत कलियाँ मुरझाई ,
चुप्पी हो गई सब पटुताई .
साम की मधुरिम वीणा ने भी ,
स्वर अपना खोया होगा .
शायद वह कुछ रोया होगा .

छितरा छितरा नील गगन है.
खाली खाली मेरा मन है .
चारों तरफ दुनियां के मेले ,
फिर भी लगता क्यों हैं अकेले.
उसने भी तो बारिश करके ,
मन के मैल को धोया होगा .
शायद वह कुछ रोया होगा .

कुछ भीगी भीगी पलकें हैं .
औ बिखरी उलझी अलकें हैं ,
फैला है आँखों का काजल ,
वरुण कपोलों पर खारा जल ,
कह दी उसने मन की बातें ,
जब ख़त का कोर भिगोया होगा .
शायद वह कुछ रोया होगा .
शायद वह कुछ रोया होगा .

20 Comments

  1. Harish Chandra Lohumi says:

    एक उच्च स्तर की रचना ! हर शब्द और अर्थ अपनी कसौटी पर बिलकुल खरा ! वाह ! सलामत रहे यह लेखनी !
    अन्य कवियों की रचनाओं पर भी आपकी प्रतिक्रया,रेटिंग और मार्गदर्शन मिल जाए तो सोने पे सुहागा हो जाएगा डाक्टर साहब !

  2. Vishvnand says:

    उत्क्रष्ट और है मनभावन
    सुन्दर सा जो इसमें है कथन
    रचना पढ़ पाया बहु आनंद
    स्वीकार करें ये अभिवादन ….
    Kudos

  3. renukakkar says:

    बहुत अच्छी रचना है !

  4. शब्दहीन कर दिया सर आपने इस रचना से !! मन को छू गयी

  5. chandan says:

    अति मन भावन अति ओजस्वी लेखनी डॉ मनोज

  6. rajiv srivastava says:

    aap ne is manch ka sttar aur uuncha kar diya1 bahut bahut badahai! aise hi likhte rahen

  7. sudha goel says:

    बहुत ही सुन्दर रचना है!
    सुधा गोयल

  8. Prem Kumar Shriwastav says:

    इतनी सुन्दर कविता के लिए बहुत बहुत बधाई…बहुत सुन्दर कविता है…

    • manojbharat says:

      Adarniya srivastav ji

      Apki madur-madhur pratikriya ke liye dhanyavad.
      Bhavishya me bhi nirantar sneh barsaten rahen.
      Abhar sahit pranam.

  9. CS_Aithani says:

    Liked it.

  10. Shilpa Saxena says:

    uttam koti ki kavita !!…lajavab shaile…

    • manojbharat says:

      @Shilpa Saxena,
      sunderta ya shreshthta anubhavak ke man me hoti hain.
      atah mera manana hai ki aapne meri kavita ko sanman diya atah aap bhi uttam hain.

      Pratikriya ke liye Dhanyavad.

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