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दूसरे महात्मा

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Apr 2011 Contest, Hindi Poetry

Pre 1947

वो लुटेरे थे
ज़ालिम थे
कुछ चंद लोगों ने
बनाया गुलाम हमे

उन माओं से पूछो
जिनके वीर मरे
आजादी की जंग मे
क्या आ गया था समय

बर्दाश न हुआ
आज़ादी की सांस घुटी
उठी एक आवाज़
जो छु गयी हर आत्मा

कठोर संघर्ष
पर हिम्मत से
अहिंसा का नारा देके
आजादी जीता वो महात्मा

वह दुश्मन थे विदेशी

Post 1947

वो लुटेरे हैं
ज़ालिम हैं
कुछ चंद लोगों ने
फिर बनाया गुलाम हमे

उन स्वतंत्र सेनानियो से पूछो
क़ुरबानी दी थी
आजाद हुए हम सब
दुर्भाग्य, क्या आ गया है समय

बर्दाश नहीं होता
फिर सांस घुटी
फिर उठी एक आवाज़
जगाओ फिर हर आत्मा

फिर कठोर संघर्ष
फिर हिम्मत से
अन्ना आगे बड़ो
और बनो दूसरे महात्मा

इस बार दुश्मन है स्वदेशी

28 Comments

  1. Harish Chandra Lohumi says:

    वाह ! क्या बात है विजू जी ! एक तुलनात्मक रेखाचित्र !
    गज़ब की रचना ! हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

  2. Vishvnand says:

    वाह वाह, बहुत बढ़िया अंदाज़ और प्रभावी कथन
    Kudos
    रचना अति सुन्दर, अर्थपूर्ण
    आज का स्वदेशी दुश्मन है महा हीन
    अन्ना के आन्दोलन ने जगा दिया
    रिश्वतखोरी करना है ख़तम
    चाहे हो बड़ा ये कार्य कठिन
    मिल लड़ना है खाकर के कसम …
    करना है पापियों के नाक में दम…

  3. renukakkar says:

    very nice poem… i liked it

  4. viju says:

    Thanks Renu

  5. kusumgokarn says:

    A fine tribute to Anna’s crusade.
    Kusum

  6. surenmohta says:

    Anna ke sath Tum,
    Anna ke sath Hum,
    Dushman chahe jo ho,
    tod de dum

  7. surenmohta says:

    विजुजी

    आपने अन्ना की लड़ाई को बहुत ही सुन्दर ढंग से रेखांकित किया है

    सुरेन्द्र

  8. NARINDER BHAKOO says:

    GOOD POEM, AISAE LOG MILTAE RHAENGAE TOA SHAYED SUDHAR HO JAYEE.

  9. chandrraa says:

    बहुत खूब एकदम सही विचार हम आप से सहमत है .

  10. chandrraa says:

    कभी कभी न जाने क्यों ऐसा महसूस होने लगता है हम सिर्फ एक मूक दर्शक ही बनकर रह गए है , इन भ्रष्टाचारियो को कोई अस्सर नहीं होने वाला , उन्हें पता है जनता सिर्फ ट्विट्टर पर अपने मत प्रकट करने के सिवा कुछ नहीं करने वाली ,आज आवश्यकता है गंभीर मंथन की जंतर मंतर पर बैठने से कुछ नहीं होने वाला सिवा कागजी घोड़ों के,हमारे देश की जनता बहुत भोली है उसे अपने रोज के अभावों को पूरा करते हुए ही जीते चले जाना है…

    • vijay says:

      @chandrraa,
      Kuch haadtakaap theek ho,yet, janta bholi nahee, apni roj marra ki zindagi mey fasi hui hai, but trust me Chandrahas, some day, egypt like revolution will take place, the shakles will be broken & people will come to the streets. its a matter of time when

  11. kuldeep sharma says:

    वाह, क्या बात हे
    बहुत बढ़िया कविता की रचना की है
    मजे आ गए है
    वो

  12. neelkanth says:

    వేరి గుడ్ పోఎం అస్ యు హవె వ్రిత్తెన్ ఇన్ హిందీ ఐ జస్ట్ కోల్డ్ ఉన్దేర్స్తాండ్.కీప్ ఇట్ అప్.

  13. Shailendra Saksena says:

    Yah ek aam hindustani ki aawaz aur soch hai jise aapki kalam ne himmat kar likha hai Aisa hi likhte rahiye aur aam hindustani ki alakh jagate rahiye. Kabhi to barf pighlegi

  14. Shailendra Saksena says:

    I cngratulate u for penning such a wonderful poem-a need of the hour

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