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जीवन मृत्यु दो किनारे हैं………….

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Hindi Poetry

इस नश्वर तन का मोह करें क्यों, एक दिन तो मिट जाना है
एक कर्म ही संग जायेगा तेरे, संग और नहीं कुछ जाना है |

बस मोह माया का खेल रचा कर, आँख मिचौली जग खेले
तेरे मेरे कहतें हैं सब, सब कुछ ही यहाँ बेगाना है |

झूठे सुख को ही सच मानें, सच्चाई से कतराते हैं
मुट्टी को बंद किये आते, और हाँथ खोल कर जाते हैं |

जीवन है पल दो पल का खेल, जग से जाना सच्चाई है |
जब वस्त्र पुरानें हो जाते, परिधान नई पहनाई है

ये संसार मोह का सागर है, हम सब इस वेग के धारे हैं
सुख दुःख इसके दो पहलु हैं, जीवन मृत्यु दो किनारे हैं |

स्वयं प्रभा

14 Comments

  1. Vishvnand says:

    अर्थपूर्ण अच्छी सी Philosophical रचना
    मन भायी
    बधाई

  2. Harish Chandra Lohumi says:

    जीवन का “विचित्र किन्तु सत्य” वर्णन !

  3. dr.ved vyathit says:

    बहुत सुंदर बधाई

  4. siddha Nath Singh says:

    kabhi kabhi paramparagat vichardhara ka pun: bahaav bhi rochak hota hai.

  5. rajiv srivastava says:

    satya vachan madam !yahi baat agar sab ke samajh me aa jaye-to kya baat hai !

  6. sushil sarna says:

    सुंदर अर्थपूर्ण और दार्शनिक रचना – प्रभु का द्वार और प्रभु से प्यार बस यही है इस रचना का सार-बधाई

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