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हजारे के पीछे हजारों लगे

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Apr 2011 Contest, Hindi Poetry
हजारे के पीछे हजारों लगे
ये अन्ना तो बन्ना से प्यारे लगे. 
 
ये अनशन तो सन सन चला इस तरह
सफेदपोश सारे उघारे लगे.
 
न है आचरण और न है आत्मा
हुआ धर्म का इस तरह खात्मा.
 
हुई ऐसी सुगबुग कि जनता उठी
जिसे देख थर्रा सी सत्ता उठी.
 
स्वत: चल पड़े लाख हैं नौजवान,
बहुत हो चुका, कहता हिन्दोस्तान
 
ये आशा जगी हर ह्रदय में पुन:
कि शायद ये किश्ती किनारे लगे.

6 Comments

  1. c k goswami says:

    समसामयिक और
    सुन्दर विचारों के कद्रदान कम ही मिलेंगे ,पर उनमे से एक मैं हूँ,हालाँकि कविता छोटी है है किन्तु इसका अर्थ बहुत बड़ा है. अन्य कवी भी ऐसे विषय चुन कर राष्ट्रभक्ति की भावनाएं जगाएं.

  2. Harish Chandra Lohumi says:

    ये हुई ना बात ! गज़ब ढा दिया एस.एन. साहब ! बधाई !

    लौह सा इनका व्यक्तित्व मन भा गया,
    इनके आने से जन-वक्ष तन सा गया,
    दमक में ये पन्ना से न्यारे लगे,
    ये अन्ना तो बन्ना से प्यारे लगे.

  3. Vishvnand says:

    अति सुन्दर सामयिक मनभावन और अर्थपूर्ण
    रचना के लिए हार्दिक अभिवादन

    बात तो बिलकुल सही
    हजारे जी के पीछे support में हम सब हजारों लाखों प्यार और लगन से हैं लगे
    मगर जिन corrupt हज़ारो के पीछे हजारे जी के साथ हम सब हैं लगे
    वो अब घबराकर घिनौनी तरकीबों से हजारे जी और साथिओं के पीछे हैं लगे
    हमको बहुत सावधान रह अंत तक एकजूट हो लड़ना है जब तक मंजिल न मिले

  4. Sanket Singh says:

    Meaningful and very good

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