« »

“चिन्ता”

3 votes, average: 4.33 out of 53 votes, average: 4.33 out of 53 votes, average: 4.33 out of 53 votes, average: 4.33 out of 53 votes, average: 4.33 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

चिन्ता

हैलो…. माँ !

मेरी नौकरी लग गयी !

बहुत अच्छा हुआ बेटा,

भगवान तुम्हें सुखी रखे,

तुम्हें दिन दूनी, रात चौगुनी उन्नति मिले ।

लेकिन बेटा, अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना ।

 

हैलो… बाबू जी !

आज मैंने कार खरीद ली !

बहुत अच्छा बेटा,

ध्यान से चलाना,

लापरवाही बिलकुल मत करना,

अपने खाने-पीने में कमी मत करना,

जान है तो जहान है ।

 

हैलो …… माँ  ! हैलो… बाबूजी,

आज मैनें अपना फ़्लैट खरीद लिया !

बहुत अच्छा बेटा !

भगवान तुम्हें सलामत रखे,

अपनी तन्दुरुस्ती का ध्यान सबसे पहले रखना,

तभी हमें असली खुशी होगी ।

 

हैलो ! हैलो !! हैलो !!!

कौन !

जरा जोर से बोलो बेटा,

सुनायी नहीं पड़ रहा है,

कान कमजोर हो गये हैं।

जोर से ही तो बोल रहा हूँ !

अब और कितनी जोर से बोलूँ !

पूरा गला दर्द करने लगा है।

बेटे ने फोन काट दिया ।


बूढ़े माँ-बाप की चिन्ता और बढ़ गयी,

कहीं उनके बेटे का स्वास्थ्य खराब तो नहीं !


***** हरीश चन्द्र लोहुमी

16 Comments

  1. s n singh says:

    marmik aur vastavikata ko blow up kar andhe ko bhi aaeena dikhane vali panktiyan.baht khoob

  2. rajivsrivastava says:

    kya khoob aur sach likha hai .—— aaj bachhe apne aakash ko chune me lage rahte hai ye bhool kar ke ki jameen par koi unhe apne boode aankho se dekh raha hai- well said

    • Harish Chandra Lohumi says:

      @rajivsrivastava, प्रोत्साहन का शुक्रिया राजीव जी. आपकी रचनाओं और प्रतिक्रया के बिना मंच सूना सा लगता है.
      अतः उपस्थिति बनाए रखें .

  3. Vishvnand says:

    बहुत बढ़िया ह्रदयस्पर्शी रचना है, बधाई
    पर आज ज़माना क्या बदला नहीं है?
    मैंने देखा है और अनुभव भी किया है आजकल बेटे और बेटियों को अपने माता पिता का बहुत ख्याल रहता है. परिस्थिति के कारण वो उनके पास नहीं रह सकते पर हर हाल में जैसे बन सके उनकी मदद करते रहते हैं भला वो पैसे की ही क्यूँ न हो. बूढ़े माँ बाप ने भी अपने बच्चों की मजबूरी समझना उतना ही जरूरी है. दूसरे लोगों के बहकावे में नहीं आना है
    Rather than blaming each other a proper arrangement worked out by children for their parents to be being looked after well & a profound understanding in love can only be the answer

    “बूढ़े माँ-बाप की चिन्ता और बढ़ गयी,
    कहीं उनके बेटे का स्वास्थ्य खराब तो नहीं !”

    पर माँ बाप सही नहीं सुन पाए थे
    उधर बेचारा बेटा अस्वस्थ और चिंतित हो गया .
    जल्दी से उसने flight पकड़ी
    और विदेश से तीसरे दिन घर आ पहुंचा
    बूढ़े माँ बाप खुशी से फूले न समाये
    बेटा भी उन्हें स्वस्थ पा खुश हो गया
    बोला अब मैं यहाँ आपके स्वस्थ रहने की पूरी व्यवस्था करूंगा
    उसके बाद ही अपने काम पर लौटूंगा
    और अब सदा आपके संपर्क में रहूँगा .

    • amit478874 says:

      @Vishvnand, क्या बात है सरजी..! आपने तो पूरी कविता में नयी ही जान फूंक दी..! बहुत ही बढियां अंदाज़…! हरीशजी और आप की कविता को मिला कर के मै ५ star अगर देता हु तो वो भी यहाँ तो कम है….! 🙂

      • Harish Chandra Lohumi says:

        @amit478874, यथार्थ और कल्पना का मिलन कुछ होता ही ऐसा है अमित जी ! सस्नेह आभार .

    • Harish Chandra Lohumi says:

      @Vishvnand, हार्दिक आभार और धन्यवाद सर ! दूसरे पहलू पर लिखी गयी इस रचना के पहले पहलू को भली भांति व्यक्त कर इस रचना को आपने और भी रोचक बना दिया.
      पिछले क्रिसमस पर एक वृद्धाश्रम के भ्रमण के दौरान उपजी थी यह रचना.
      वहां पर रह रहे एक बुजुर्ग का तो कहना था कि उनके बेटे-बहू उनसे कहते हैं कि वो उन्हें अपना सालभर का खर्चा बता दें ताकि एक बार में ही वो अपनी सालभर की जिम्मेदारी निभा लें. उनकी आँखों में सालभर का खर्च एक साथ लेने पर चमक रहती हो या नहीं पर हम लोगों द्वारा सप्रेम वितरित किये गए एक-एक बिस्कुट के पैकेट और उनके साथ कुछ देर बैठ कर बात करने में उनके चेहरों पर जो मुस्कान हम लोगों को दिखायी थी वो हमें बहुमूल्य प्रतीत हुई .
      भगवान उन सभी बुजुर्गों की संतानों को सद्बुद्धि दे जिनके पास सबकुछ होते हुए भी बुढापे में अपने लिए कुछ नहीं होता .

  4. amit478874 says:

    बहुत ही बढियां अंदाज़ पिता की अपने बेटे के प्रति चिंता जताने का…! वैसे सरजी..(विश्वनंद्जी) ने भी एक जान सी फूंक दी कविता में..! बहुत बढियां…! 🙂

    • Harish Chandra Lohumi says:

      @amit478874, धन्यवाद अमित जी ! वैसे नहीं पूर्ण रूप से सजीव प्रतिक्रया रही आदरणीय विश्वनंद सर की .
      एक मार्ग-दर्शन है नयी पीढी के लिए कि आज के युग में भी हैं कुछ बच्चे जो कि माता-पिता के प्रति संवेदनशील हैं.

  5. pallawi says:

    दिल तक पहुँचती है आपकी कविता ! बधाई !!

  6. jaspal kaur says:

    Very touching poem. I totally agree with Vishvanandji’s views.

  7. एक अच्छी रचना , जीवन के सच को दर्शाती हुई , विश्व जी के नज़रिए से पूरी तरह सहमत – बधाई

    • Harish Chandra Lohumi says:

      @Swayam Prabha Misra, हार्दिक आभार और धन्यवाद स्वयं प्रभा जी, जीवन के सच और विश्व जी के नज़रिए पर सहमति व्यक्त करने के लिए.

Leave a Reply