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कोई रह-रह पूछे कौन मिटा जिस पर दिल जाए

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Hindi Poetry

कोई रह-रह पूछे कौन मिटा जिस पर दिल जाए

कहाँ कौन वह सता तुझे जो यादों को तड़पाए

है वह कौन मिटा दिल जिस पर तरसा तू रह आता   

बता रुलाए कौन तुझे ख़्वाबों में आता जाता   

उफन उमड़ अनवरत बहे स्मृतियों की सरिता सी

लगे बिबस मजलूम उदासी जो भोरी कविता सी

 

क्या कह कोई बतलाए उलझन वह एक पहेली

खेल रही सपनों से मेरे जैसे संग सहेली

एक हकीकत अनसुलझी अनबूझी दूर ठिकाना 

दूजी गुंथी धडकनों में बुनती सपनों का ताना

अनजानी सी वह जो डर भग चली छोड़ सब सूना

मेरी वह जो रमी गीत बन रचती मुझको दूना

 

 छबि निहारता चकित नयन चित सोच उलझ रह आया  

संभ्रम में मन सम्मोहित सच कभी समझ ना पाया 

यह या वह सच कौन झूठ थी कौन वही इक जाने

छलना एक क्रूर या कविता करुण वही पहचाने

 

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2 Comments

  1. एक सुन्दर रचना – बधाई

  2. prachi sandeep singla says:

    good attempt 🙂

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