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नफ़रत करना मेरी फ़ितरत नही है! (ग़ज़ल) with audio link

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Hindi Poetry

nafrat karna meri fitrat nahi hai

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(when audio starts click on back arrow to read while u listen)

 

 

नफ़रत करना मेरी फ़ितरत नही है! (ग़ज़ल)

 

 

नफ़रत करना मेरी फ़ितरत नही है,

फिर भी जाने क्यों किये जा रहा हूँ,

चंद लम्हो की कभी खुशियाँ मिलेंगी,

इसी आरज़ू में जिये जा रहा हूँ!

 

हम भी कभी थे शमा के दीवाने,

और परवाने जैसे जल-जल मरे थे,

अब इस दिल का हाल ना पूछो,

सौ टुकड़े है इसके सिये जा रहा हूँ!

 

नफ़रत करना मेरी फ़ितरत नही है

फिर भी जाने क्यों किये जा रहा हूँ

 

 

फूलो सी गुलशन थी बगिया हमारी,

इसमे ही पलती थी खुशियाँ तुम्हारी,

जब से तुमने मेरा साथ है छोड़ा,

मैं खुद से ही नफ़रत किये जा रहा हूँ!

 

नफ़रत करना मेरी फ़ितरत नही है

फिर भी जाने क्यों किये जा रहा हूँ

 

 

कभी जाम से हम को नफ़रत बड़ी थी,

थी दुश्मन हमारी ये दुनिया जहान की,

अब इसके बिन मेरा जीना है मुश्किल,

क़तरा -क़तरा लबो से पीये जा रहा हूँ!

 

नफ़रत करना मेरी फ़ितरत नही है

फिर भी जाने क्यों किये जा रहा हूँ

चंद लम्हो की कभी खुशियाँ मिलेंगी

इसी आरज़ू में जिये जा रहा हूँ

 

 

 

 

डॉक्टर राजीव श्रीवास्तवा

 

5 Comments

  1. Vishvnand says:

    गीत का बढ़िया अंदाज़ .
    बहुत मन भाया.
    पर Audio नहीं सुन पाया.
    mp3 format में record कीजिए
    तो सुनाने में सुविधा होगी …

  2. Vishvnand says:

    गीत का बढ़िया अंदाज़ .
    बहुत मन भाया.
    पर Audio नहीं सुन पाया.
    mp3 format में record कीजिए
    तो सुनने में सुविधा होगी …

  3. Abhishek Khare says:

    Bahut hi khoobsurat ghazal, 4 sitare

  4. Abhishek Khare says:

    Aha you got very good voice man, it was well sung I enjoyed a lot. You were bit fast otherwise it was too good. Keep posting Audio. Cheers

  5. Vikash says:

    http://blog.p4poetry.com/2008/11/audio-poems-101.html Please look at the link on how to post podcast. This way people can hear your poem on the website itself without the need to downloads.

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