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“व्यथित मन के यक्ष-प्रश्न!?”

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Anthology 2013 Entries, Hindi Poetry

(यह रचना जापान पर बरसे प्रकृति के कहर को देख स्वतः ही दिल से फूट पड़ी है…शायद ऐसे ही कुछ सवाल आपके मन में भी उठ रहे होंगे…)

 

सामने आती मौत को देख, तिल-तिल मरना?

काल को गले लगाकर, न बचने के प्रयास कर सकना?

कैसा होता है आख़िरी सफ़र पर, बिना किसी को बताये चल देना?

क्या पूर्व कल्पना संभव है, प्रकृति के इस प्रहार की?

 

क्या कोई है रखवाला, इस संसार का?

क्या मारे गए सब समूह, लोग पापी थे?

क्यूँ कोई उत्तर स्वरूप, आकाशवाणी नहीं करता?

या नहीं देता चेतावनी, जीवन बचाने की?

 

क्या बिगाड़ा होगा उन मासूमों ने किसी का?

क्या जात-पात पूछकर आती है मौत?

क्या जान देते वक़्त याद आता होगा उद्देश्य? प्रेम? कर्तव्य? कोई अपना?

या यूँ ही सीने में प्रश्नचिन्ह लिए चले जाना है हमें भी एक दिन?

ऐसे पुनर्जन्म की आशा में जिसका शायद अस्तित्व है या शायद नहीं…

 

प्रण लेना होगा आज ही, इसी समय, इसी क्षण…

कि हम हर पल को अपने जीवन का आख़िरी पल समझ,

सकारात्मक रहेंगे, ख़ुश रहेंगे, ख़ुशियाँ बाँटेंगे, दोस्त बनायेंगे,

और प्रकृति एवं मानवता के साथ चल अच्छा मनुष्य बनेंगे…मरने से पूर्व…

 

हाँ! अगले पल…मरने से पूर्व…

 

-प्रवीण

12 Comments

  1. s.n.singh says:

    uttam rachna, bhavna aur vivek ka sammishran karne kee seekh

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @s.n.singh, शायद हृदय उम्र से पूर्व ही गंभीर हो गया है…उसने जो कहा, सुनकर पेश कर दिया… 🙂

      बहुत-बहुत धन्यवाद् प्रशंसा एवं प्रोत्साहन के लिए… 🙂

  2. sushil sarna says:

    शब्दों की छैनी से काल को एक हकीकत का रूप दे वास्तविकता से रूबरू कराती संवेदनाओं में डूबी और अंत से पूर्व अनंत बनने की सीख देती सुंदर रचना-हार्दिक बधाई प्रवीन जी

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @sushil sarna, आपके शब्दों ने मेरी रचना को पूर्णता प्रदान की है… 🙂

      बहुत-बहुत धन्यवाद् प्रशंसा एवं प्रोत्साहन के लिए… 🙂

  3. Vishvnand says:

    उत्स्फूर्तता लाज़वाब और अतिसुन्दर गहन अर्थ की प्यारी अति संवेदनशील मनभावन रचना. बचे लोगों को लाज़वाब सीख.
    जीवन की क्षणभंगुरता का सहज दर्शन और दर्पण .
    सुशील जी की इस सुन्दरतम रचना की सुन्दर प्रतिक्रिया का पूर्ण अनुमोदन
    रचना के लिए हार्दिक अभिवादन

    Stars 5 + + +

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @Vishvnand, दादा, बहुत-बहुत धन्यवाद् प्रशंसा एवं प्रोत्साहन के लिए… 🙂

      और इन अनमोल 5 सितारों को आँखों में समेटने का प्रयास कर रहा हूँ…ताकि चमक बनी रहे… 🙂

      अपना आशीष इसी प्रकार बनाए रखिये… 🙂

  4. Harish Chandra Lohumi says:

    सत्य,सीख और मर्म सब कुछ संयोजित है प्रवीण जी,
    सप्रेम भेंट के साथ बधाई इस संतुलित रचना के लिए. 🙂

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @Harish Chandra Lohumi, हरीश जी, आपकी भेंट हृदय से स्वीकारता हूँ… 🙂

      और आगे भी मुझे प्रेरित करते रहें ताकि ये संतुलन अनवरत बना रहे… 🙂

  5. U.M.Sahai says:

    एक अति-उत्तम रचना, प्रवीण जी, ख़ास कर ये पंक्तियाँ :
    क्या कोई है रखवाला, इस संसार का?
    क्या मारे गए सब समूह, लोग पापी थे?
    हमें बहुत कुछ सोचने केलिए मजबूर करती हैं.
    बहुत बधाई.

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @U.M.Sahai, बहुत-बहुत धन्यवाद् सहाय साहब… 🙂

      और अब तो मौत से भी डर के बजाय सहानुभूति सी होने लगी है…कि

      ए मौत, आना तो तुझे है ही, ज़रा शान से तो आ…
      मैं हूँ बेखोफ़ आदमी, मुझसे ना मुँह छुपा… 🙂

  6. parminder says:

    बहुत खूब! प्रकृति बहुत कुछ सिखा रही है जो हम अनदेखा कर रहे हैं| पर यह सबक भी अगर पल्ले बाँध लें कि अंत तो निश्चित्त है फिर क्यों न प्यार बांटे तो जो बाक़ी है उस ज़िंदगी को तो सफल कर लें|

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @parminder, बिलकुल सही कहा आपने…प्रेम ही सबसे बड़ी शक्ति है इस विश्व की…निस्वार्थ प्रेम… 🙂

      प्रशंसा एवं प्रोत्साहन के लिए आपका हृदय से आभारी हूँ परमिंदर जी… 🙂

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