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प्यार पे विश्वास!

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Hindi Poetry

आज जिंदगी के इस मोड़ पे अकेला खड़ा हूँ,

ना कोई अपना ना हमदर्द समझ आता है,

जिस पर किया था सब से ज़यादा यकीन हम ने,

वही गैरो के कितना करीब नज़र आता है!

औरो के चहेरे की शिकन भी दिख जाती है उन्हे,

मेरी आँखो का दर्द बेकार समझ आता है,

मेरा रूठना जिनके लिए कयामत था कभी,

आज उन्हे चहेरे पे लगा एक नकाब नज़र आता है!

वो किसी ओर पे इतना विश्वास कर बैठे है,

मेरा समझना उन्हे नागवॉर समझ आता है,

मेरी बातो मे मेरी खुदगर्जि दिखती है उन्हे,

कुछ लोगो को चाँद मे बस दाग नज़र आता है!

एक दिन खुद समझ जायेंगे मेरे दिल को,

आज जो उन्हे टूटा हुआ सामान समझ आता है,

मेरी बाहो मे ही तुम्हे चैन मिलेगा अंत मे,

मुझे मेरे प्यार पे ये विश्वास नज़र आता है!

डॉक्टर राजीव श्रीवास्तवा

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    सुन्दर सी रचना जंची
    तकलीफ है, पर मन भायी
    जिस मूड में लिखी उस मूड का कमाल है
    वरना ऐसे ख़याल तो प्यार में temporary ही बात है
    रचना के अंदाज़ के लिए बधाई
    commends

  2. Harish Chandra Lohumi says:

    मेरा रूठना जिनके लिए कयामत था कभी,
    आज उन्हे चहेरे पे लगा एक नकाब नज़र आता है!
    बहुत अच्छा अन्दाज़ !
    लगता है पहले जख्म दिये गये, फ़िर कुरेदे गये ।

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