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फूल तो बनो

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Hindi Poetry

फूल तो बनो

फूल तो बनो

मधु देने में समर्थ तो हो जाओ

रंगों को खिलाओ तो

सुगंध को बिखेरो तो

काँटों में भी मुस्कराओ तो

धूप को भी झेलो तो

वारिश में पाँख २ भिगो तो

तितलियाँ स्वयं आ जाएँगी

तुम्हारे पास

तुम्हारी होने के लिए|

12 Comments

  1. siddha Nath Singh says:

    बहुत सुन्दर, मगर आज कल फूल को “fool” बनाने का चलन ज्यादा है.

  2. rajivsrivastava says:

    sachmuch sir phool babana bade saubhagya ke baat hai–jo apne paas kuch nahi rakhta sab kuch baant deta hai badaha

  3. Vishvnand says:

    फूलों सी सुन्दर नाजुक रचना
    मनभावन
    हार्दिक बधाई

  4. Vishvnand says:

    अब तक कमेन्ट किया ३ ने, rating की सिर्फ १ ने पढी १० ने .. ? 🙁

    • dr.ved vyathit says:

      @Vishvnand, बन्धुवर यह समझ नही प् रहा हूँ इस में आप का क्या मन्तव्य है

      • dp says:

        @dr.ved vyathit, सर जी इसका मतलब है कि आप दूसरों की रचनाओं को भी पढ़ें. यदि आप गौर से देखेंगे तो रचना के शीर्षक के नीचे कवी के नाम के पास आपको * * * * * पांच तारे बने नज़र आयेंगे . आपको बस किसी एक तारे पर माउस से क्लिक करना है जो आपको “कविता कैसी लगी ” के हिसाब से करना है . गंदी लगी तो बांये से पहले तारे पर, यदि आप उस रचना में सुधार की जरूरत समझते हैं तो बाएं से दूसरे तारे पर,रचना अच्छी लगी तो तीसरे तारे पर,रचना बहुत अच्छी लगी तो चौथे तारे पर और यदि रचना विशेष लगी तो पांचवे तारे पर माउस से कलिल करें . उसके बाद ही अपनी प्रतिक्रया दें.
        और हाँ, पहले P4POETRY.COM मंदिर के अन्दर जाइए आर्थात Login करिए और तब ही आप किसी भी तारे पर क्लिक कर पायेंगे .
        अन्यथा वोटर लिस्ट से आपका नाम गायब, आपका माउस आपको क्लिक नहीं करने देगा .
        याद रखें – VOTE IS MORE POWERFUL THAN BULLET.
        यहाँ पर Bullet का मतलब आपके कमेन्ट से है.
        कैसी रही 🙂

        • dp says:

          @dp, और हाँ सर जी, एक बात तो बताना ही भूल गया – अपनी रचना को खुद वोट नहीं देना है अर्थात अपनी किसी भी रचना के किसी भी तारे पर क्लिक नहीं करना है ।
          ये तो परीक्षा के उपरान्त अपनी पुस्तिका को खुद ही जाँचना हो गया ना 🙂
          सादर प्रणाम सर जी ।

      • Vishvnand says:

        @dr.ved vyathit

        मेरा मतलब यह था क़ि जब 3 जनों ने कमेन्ट किया है तो उन्होंने rating भी करनी थीं और क्यूंकि rating करने के लिए कमेन्ट करना जरूरी नहीं है तो अगर 10 जनों ने कविता पढी है तो Rating करनेवालों की संख्या भी ३ से ज्यादा हो तो बेहतर होता.

        अशा करता हूँ क़ि आपने मेरी निम्न postings पढ़ी हों.

        (१) क्यों Rating करने में उदासीनता ….? http://p4poetry.com/2011/02/09/rating-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E2%80%A6/

        (२) रचनाओं की रुसवाई ….! http://p4poetry.com/2011/02/14/%E0%A4%B0%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%८८

        आपसे भी अनुरोध है क़ि आप भी अन्य मेम्बेर्स की रचनाओं को पढ़ उन पर आपकी rating जरूर दें और जब हो सके कमेन्ट भी …

  5. Abhishek Khare says:

    अच्छी रचना सर जी | ३/५
    मैं अब अपने कमेन्ट के साथ सितारे भी लिखने लगा हूँ |

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