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‘ प्रण ‘

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Hindi Poetry, Jan 2011 Contest
               ‘ प्रण
 
नित नए बनते हैं प्रण ,
और टूट जाते हैं प्रतिक्षण !
प्रण लेना तो है सरल ,
लेकिन उसे निभाना है मुश्किल !
हर रोज़ बनते-टूटते हैं ये प्रण ,
फिर भी हम लेते हैं ये प्रण !
प्रण लेना ही है तो
चलो हम मिलकर यह प्रण लें ,
प्रण लें  किसी एक बच्चे को साक्षर करने का ,
प्रण लें किसी एक बुरी आदत को छोड़ने का ,
प्रण लें किसी एक गरीब की मदद करने का ,
प्रण लें किसी रोते हुए को हंसाने का ,
प्रण लें सबके बीच खुशियों को बाँटने का ,
प्रण लें इंसानों के बीच की नफरत मिटाने का ,
प्रण लें किसी एक बेसहारा को सहारा देने का ,
प्रण लें किसी पथभ्रष्ट को सही राह दिखाने का ,
प्रण लें अन्याय के प्रति विरोध प्रकट करने का ,
प्रण लें किसी एक अन्धविश्वास को मिटाने का ,
प्रण लें किसी भी बुराई को न अपनाने का ,
प्रण लें प्रेम और भाईचारे को बढ़ाने का ,
और प्रण लें अपने इस प्रण को निभाने का !
ग़र अपने देश की एक अरब आबादी में से 
हर कोई लेकर एक नया प्रण ,
पूरा करे यदि उसे लगन से ,
तो मिल जाएगा हमें चारों तरफ 
सुख, समृद्धि और शांति का वातावरण ,
और मिल जाएगी अपने देश को
विश्व पटल पर एक नई पहचान !
 
  – सोनल पंवार  

14 Comments

  1. Vishvnand says:

    प्रण पर सुन्दर भावाभिव्यक्ति
    अर्थपूर्ण भावपूर्ण रचना और कृति
    कही बात प्रशंसनीय और आदरयुक्त है
    रचना के लिए हार्दिक बधाई है

  2. siddha nath singh says:

    शुभ संकल्प फलित भी होंगे.कृति में प्रतिविम्बित भी होंगे.
    प्रगति हेतु प्रतिबद्ध रहे तो,पौधे बढ़ पुष्पित भी होंगे.
    स्वागतम सोनल जी.

  3. rajivsrivastava says:

    bahut satya kaha Sonal ji–badahai

  4. Harish Chandra Lohumi says:

    कई अच्छे-अच्छे प्रणों को दर्शाती यह रचना “प्रण” बहुत मन भायी ! बधाई और शुभकामनाएँ !
    एक प्रण और लेना है हम सभी को : आज से हम सभी एक-दूजे की रचनाओं पर अपनी प्रतिक्रिया और रेटिंग देंगे ! कैसा लगा यह प्रण ! 🙂

    • sonal says:

      @Harish Chandra Lohumi, आपकी इस टिप्पणी के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद् !
      आपका यह प्रण बहुत अच्छा है लेकिन माफ़ कीजियेगा मुझे exams की वजह से कम ही समय मिल पाता है ! फिर भी मैं कोशिश करुँगी !

  5. P4PoetryP4Praveen says:

    बहुत अच्छी रचना है…और प्रण भी सराहनीय है आपका…

    लेकिन हरीश जी के प्रण की तो बात ही क्या… 🙂

    (कुछ सुझाव/सुधार इस प्रकार हैं : “है” और “हैं” का अंतर स्पष्ट कीजिये…और “तो मिल जाएगी” के स्थान पर “तो मिल जाएगा” होगा…क्योंकि वातावरण की बात की जा रही है…और एक बात कोमा से पहले अनावश्यक स्पेस भी हटा लें…)

    • sonal says:

      @P4PoetryP4Praveen,आपकी इस टिप्पणी एवं सुझाव के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद् !
      आपके बताएनुसार मैंने कविता में सुधार कर लिया है !
      वाकई में हरीश जी के प्रण की तो बात ही क्या…

  6. rajdeep says:

    Beautiful

  7. renukakkar says:

    nice attempt , but why does it sound more like a political party manifesto ? sorry, i have rated it 4 as i don’t like it so much

  8. Sandeep says:

    Subject is nice but presentation is very repetitive
    I am sorry Sonal, but if possible try to frame it in again with the modern concept.. I mean like “All is well…” hope u understood..

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