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“नीम का पेड़”

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Hindi Poetry

आज अचानक, चार साल पहले काटे गए पेड़ के ठूंठ पर,

कुल्हाड़ी चलाते हुए मुझे याद आया…

कि इसी पेड़ के नीचे तो बिताया था बचपन मैंने…

अम्मा इसी के नीचे तो खिलाती थीं बाजरे की रोटी…

और बाबा के कंधे चढ़ तोड़ा करता था मैं निम्बोड़ी…

और इसी की छाँव में कब आँख लग जाती थी पता भी न चलता…

 

फिर ऐसा क्या हुआ जो मुझे अपने इस बचपन के मित्र पर,

आज इस निर्दयता से कुल्हाड़ी चलानी पड़ रही है…

उस पर लगे चोट के निशान अब मुझे अपराधबोध से ग्रसित करने लगे हैं…

धिक्कार है ऐसे जीवन पर,

जो छाँव देने वाले बचपन के सखा को ही मौत दे दी मैंने…

 

लेकिन ये नन्हा सा पौधा आज इतना बड़ा क्यूँ लग रहा है,

जो मेरे इसी सखा की संतान है…

लगता है ईश्वर ने मुझे एक और मौक़ा दिया है प्रायश्चित का…

अब मैं इसे अपने से कभी दूर नहीं होने दूंगा,

और अपने बच्चों को भी इसका मित्र बनाऊँगा…

 

-प्रवीण

10 Comments

  1. rajdeep bhattacharya says:

    loved it

  2. rajiv srivastava says:

    aachi sandeshprad rachna–badahai

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @rajiv srivastava, राजीव भाई आप निरंतर मेरी रचनाओं पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं…आपसे तो प्रेम सा हो गया है…देखो कभी बेवफ़ाई न करना प्यार में…हाहाहा 🙂

  3. H.C.Lohumi says:

    choo gayi praveen ji !

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @H.C.Lohumi, हरीश जी, आपको छू गयी यानि मेरी रचना सफल हो गयी…लेकिन इसे वापस मेरे पास भेज दीजिये ताकि आपकी छुअन हम भी महसूस कर सकें… 🙂

      और में आपसे ग़ुस्सा हो जाऊँगा आगे से जी लगायेंगे तो… 🙁 🙂

      विश्व दादा भी कभी-कभी मेरे नाम के बाद “जी” का बोझ मेरे ऊपर लाद देते हैं…उनकी भी ख़बर लूँगा… 🙂

  4. Vishvnand says:

    The poem is very hearty
    artfully resonates heart strings within
    And stings it for subtle painful feelings
    commends

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @Vishvnand, Heartly thanks a ton dada….you got the right message…Actually I also feel the same when I see something like that…and I tried to portrayed my feelings through this poem…and I succeeded I guess… 🙂

      Again thanks dada… 🙂

  5. renukakkar says:

    बहुत अच्छा

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @renukakkar, बहुत-बहुत धन्यवाद् रेनू जी…मैं अपनी अन्य रचनाओं पर भी आपकी प्रतिक्रिया चाहूँगा…जब भी वक़्त मिले ज़रूर पढ़ियेगा…आपकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा में……………. 🙂

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