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‘ यादें ‘

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Hindi Poetry

                 ‘ यादें ‘

ज़िन्दगी के रंगीन पन्नों को

यादों की शबनम में भिगोना है मुझे ,

यादों के हर एक पल को

अपनी आँखों में संजोना है मुझे ,

बीत जाए ना ये ज़िन्दगी

वक़्त की आग़ोश में ,

वक़्त को हाथों में समेटकर

खुद को यादों के समंदर में डुबोना है मुझे !

– सोनल पंवार

6 Comments

  1. Vishvnand says:

    यादों का अतिसुन्दर सजाना
    बहुत कह गयी यह संक्षिप्त रचना
    और इसमें विदित सुहावनी भावना

    Hearty commends for the poem

  2. Harish Chandra Lohumi says:

    एक चाहत भरी रचना ! बधाई !!!

  3. rajdeep bhattacharya says:

    very nice to read

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