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“ग़म में भी हँसते हैं”

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Hindi Poetry

ग़म में भी हँसते हैं हम, किसी से गिला नहीं करते…

मनमौजी हैं यूँ ही बेवजह किसी से मिला नहीं करते…

 

डरते हैं हम भी कहीं दिल न गंवाँ बैठें…

मगर दिल के तार हर किसी से नहीं हिला करते…

 

घोल दे जो अपनी आवाज़ से कानों में मिश्री…

ऐसे ओठों की मुस्कान हम नहीं छीना करते…

 

इश्क़ की गलियों के खिलाड़ी कभी हम भी थे…

न जाने क्यूँ आज हर इक निगाह से हैं डरा करते…

 

माना कि दिल पत्थर हो गया है दीवारों के संग रहकर…

मगर “तुम” क्यूँ ये पत्थर पिघलाने की कोशिश नहीं करते?

 

-प्रवीण

18 Comments

  1. rajiv srivastava says:

    bahut hi pyari rachna———– dil kush ho gaya

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @rajiv srivastava, आपका दिल ख़ुश कर सकी, यही इस रचना की सफलता और पुरस्कार है, राजीव भाई… 🙂

  2. KasaK....Dil ki says:

    praveen ji……tareef me kuch keh pana mushkil hai….bas itna ki….

    lehje me hamare mana hai kadwahut bht
    tum kyun magar ye kadwahut dur nahin karte

    rakhte ho dil me hume sahej kar khajane sa
    kyun apne dil ki baton ko humse bayaan nahin karte

    bht hi dilchasp hai ee praveen teri ye gazal
    tum roz isi tarah ki pyari gazalein post kyun nahin karte…!!!

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @KasaK….Dil ki, अनामिका जी, आपने तो एक और सुन्दर सी रचना ही लिख डाली…इस अंदाज़-ए-बयाँ के लिए तह-ए-दिल से शुक्रिया आपका… 🙂

      और हम आपकी फ़रमाइश को मद्देनज़र रखते हुए…आगे भी कुछ ऐसा लिखने की कोशिश करेंगे… 🙂

  3. siddha nath singh says:

    अच्छी नज़्म, ग़ज़ल तो नहीं कह सकते क्योंकि रदीफ़ और काफिये का ध्यान नहीं रखा गया है और न ही वज़न ही बराबर है.

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @siddha nath singh, सिद्ध नाथ जी, दुरुस्त फ़रमाया आपने…मगर हम समझ न सके कि ये तारीफ़ है या ….. 🙂

      फिर भी आपके बेशक़ीमती वक़्त और अल्फ़ाज़ों के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया आपका… 🙂

  4. Vishvnand says:

    अति सुन्दर मनभावन भावपूर्ण रचना
    बल्कि इक बहुत प्यारा गीत है
    इसके लिए हार्दिक बधाई और अभिनन्दन है

    न हो नज़्म न हो सही ग़ज़ल हमें क्या मतलब
    ऐसे गीतों का मज़ा हम गाये बिना नहीं रहते …

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @Vishvnand, क्या बात है दादा…आपने तो “जैसी दृष्टि, वैसी सृष्टि” को चरितार्थ कर दिया…अच्छा लगा जानकर कि आपको ये रचना पसंद आई… 🙂

  5. Harish Chandra Lohumi says:

    मनमौजी लगता है लेकिन कुछ समझदार भी प्रतीत होता है यह पिघलने वाला पत्थर ! बधाई प्रवीण जी !

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @Harish Chandra Lohumi, हरीश जी, आपकी ऐसी तारीफ़ से तो ये पत्थर ऐसे ही पिघल गया…हाहाहा 🙂

      और आप मुझे सिर्फ़ प्रवीण कहें…और भी अच्छा लगेगा… 🙂

  6. सुंदर रचना – आप की सभी रचना काबिले तारीफ है

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @Swayam Prabha Misra, आपने तो एक तीर से 23 शिकार (मेरी सारी रचनाओं की प्रशंसा) ही कर डाले…क्या बात है… 🙂

      बहुत-बहुत धन्यवाद… 🙂

  7. Bhavana says:

    ishq ki sunderta tab tak dikhi deti jab tak ishq hamare sath hota hai ager vo hum se bichd jaye to jindgi mein gum hi gam cha jate hai aur phir hum un gamo mein hi apni jindegi gujar dete hai……… 🙁

    😀

  8. Bhavana says:

    इश्क की सुन्दरता तब तक दिखती है जब तक इश्क हमारे साथ रहेता है अगर वो हम से दूर हो जाता है तो हमारी जिन्दगी में गम ही गम छा जाता है और हम उन गमो में ही अपनी जिन्दगी गुजर देते है……… पैर फिर भी हस्ते रहेते है इश दुःख में भी एक एहेसास होता है
    …….. 🙂

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @Bhavana, बिलकुल सही कहा आपने भावना जी…लेकिन अगर बिछड़ जाने पर भी हम उसका अच्छा ही चाहते रहें फिर तो कोई परेशानी ही नहीं होती…यही तो होता है ना सच्चा प्यार… 🙂

  9. ritesh says:

    dil baagh baagh ho gaya…

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