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“May I go to the toilet?”

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Hindi Poetry

 

जब पिता ने हिंदी माध्यम से, अपने बेटे को निकाला…

असमंजस में उलझे बेटे को, अंग्रेज़ी स्कूल में डाला…

पहले ही दिन बच्चे का, पड़ा अंग्रेज़ी से पाला…

लंच में भी बेचारा टिफ़िन से, ना खा सका एक निवाला…

 

बच्चे की लघुशंका बन गयी, देखो कैसे दुविधा…

टीचर जी भी कैसी देखो, देखें ख़ुद की सुविधा…

कक्षा में जब बच्चे ने, मासूमियत से हाथ उठाया…

अंग्रेज़ी के बच्चों में, ख़ुद को अकेला पाया…

था वो हीन भाव से ग्रसित, फिर आगे बढ़ आया…

टीचर के कानों में जा उसने, अपना कष्ट सुनाया…

 

टीचर जी सुन उसकी बातें, पाठ पढ़ाने लगीं…

कहने लगीं…आज ही से, शिक्षा है तुमको पानी…

हिंदी में न चलेगी अब, कोई तुम्हारी कानाफूसी…

पूछो बेटा “May I go to the toilet?”…ये है सही अंग्रेज़ी…

 

लगता है अब शिक्षक की, बारी थी शिक्षा लेने की…

बच्चा बोला वक़्त नहीं, मेरे पास अधिक अब टीचर जी…

“I don’t have much time” कहा टीचर ने ऐसा बोलो…

बच्चा बोला टीचर प्यारी, हाथ मेरा तुम छोड़ो…

वरना हो जाएगी गड़बड़, मुझ पे सभी हँसेंगे सोचो…

 

टीचर ने अब ग़ुस्से में, ज़ोर डालकर पूछा…

क्या करता बेचारा बच्चा, टीचर का क़द था ऊँचा…

बच्चे के चेहरे के भाव, अब राहत से भरे थे…

पर सहपाठी उसके सारे, हा हा ही ही कर रहे थे…

 

टीचर बनना नहीं है आसाँ, टीचर को समझ तब आया…

हिंदी के उस बच्चे ने, टीचर को पाठ पढ़ाया…

भाषा को रखो दूजे, पहले भावनाओं को समझो…

सही वक़्त पर, सही पाठ हो, तभी भविष्य सबल हो…

 

-प्रवीण

20 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर रचना, बड़ा मजा आया
    सुदर मार्मिक व्यंग सौ अंक के पात्र है
    ऐसे में शिक्षक को बेचारे क्षात्र की ये शिक्षा तो उदाहरण मात्र है
    शिक्षक अब सोचेगी ऐसे में आगे क्या करना सुबुद्धि की बात है

    शहरों में जाने कितनों का कई बार ऐसा ही होता है
    किसी स्टेशन के पब्लिक toilet में बड़ा बड़ा Q होता है
    उन सब को English आती है पर उससे क्या फर्क पड़ता है…?

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @Vishvnand, दादा, इस मंच पर पहली बार अपनी हल्की-फुल्की गुदगुदाती रचना रखने का प्रयास किया था…आपको अच्छी लगी तो ये रचना सफल रही… 🙂

      आपकी इस सहृदयता का आभारी हूँ… 🙂

  2. Gargi says:

    Uttam Rachana i ever read….. the most cutest one…. hearty Congrats Praveen..!
    बहुत ही मासूमियत से आपने ये व्यंग को प्रदर्शित किया है…. 🙂 😉 🙂

  3. siddha Nath Singh says:

    सत्य वचन.

  4. rajiv srivastava says:

    cute one——- brings sweet smile at last

  5. U.M.Sahai says:

    बहुत अच्छी, मज़ेदार व सन्देश देती कविता, बधाई, प्रवीण जी.

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @U.M.Sahai, इस प्रेरक, उत्साहवर्धक व प्रशंसापूर्ण बधाई के लिए मैं आपका हृदय से आभारी हूँ… 🙂

  6. sonal says:

    @praveen…lykd ur poetry alot…i too started laughing on bachhe k halat…

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @sonal, Thanks a lot Sonal ji…My bro & Mom also liked & laughed at it… 🙂

      I always ask them to review my creation and then I upload here… 🙂

      Again thanks a lot for your valuable comment & appreciation.

  7. Bhavana says:

    वह वह वह वह बोहुत स्वीट है

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @Bhavana, लेकिन आपका कमेन्ट तो हमें और भी स्वीट लगा… 🙂

      ऐसे ही प्रतिक्रिया देते रहें…और हमें लिखने के लिए प्रेरित करते रहें… 🙂

  8. ashwini kumar goswami says:

    जब भाषा नहीं समझ में आये या शर्म लगे तो संकेतों से समझाओ,
    लघुशंका हेतु कनिष्ठिका, दीर्घशंका हेतु तर्जनी और मध्यमा उठाओ !
    यदि शीघ्रशंका हो तो बिना कहे ही सुविधा-कक्ष को भाग के जाओ,
    इसी बीच यदि निकल जाए शंका तो दौड़ के कपड़े बदल के आओ
    ये तो होती प्राकृतिक प्रक्रिया इसके लिए नहिं कभी कहीं शर्माओ,
    फिर भी शर्म को रोक न सको तो घर जाकर ही मन सहलाओ !

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @ashwini kumar goswami, सही कहा दादू आपने…और अच्छी लगी आपकी प्रतिक्रियात्मक रचना… 🙂

      और आशा है उपरोक्त बालक यह बात बाद में अनुभव के साथ अवश्य समझ ही गया होगा… 🙂

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