« »

“जागो मोहन प्यारे”

2 votes, average: 4.50 out of 52 votes, average: 4.50 out of 52 votes, average: 4.50 out of 52 votes, average: 4.50 out of 52 votes, average: 4.50 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

चीख़ और दर्द है बिखरा हुआ हर ओर…

इन अनहोनियों की न जाने कब हो भोर…

ना जाने कठपुतलियों की हाथ किसके डोर…

आँखें हैं मूंदे राष्ट्र के नेता बड़े प्रधान…

हाथ बाँधे नागरिक के, है कैसा संविधान…

 

क़ानून एक बार, सच के साथ तो चले…

न्यायालय में भी न्याय, उसी वक़्त तो मिले…

राम नाम सत्य, होने के बाद जगना क्या…

हर सबूत नष्ट, होने पे भगना क्या…

 

सोते रहो राज़ाइयां, सिरों पे तान लो…

होगी सुबह तो देखेंगे, अभी ना नाम लो… 

हम हैं सरकारी आदमी, सरकार हमसे है…

जनता की किसे पड़ी, उसकी है क्या औकात…

राजनीति के शतरंज पे, होती है उसकी मात…

 

हे मेरे प्यारे मोहन, अब भी तो जागो तुम…

जब बात आती न्याय की, तो होते कहाँ हो ग़ुम…

मुंबई हिला दिया, और दिल्ली भी हिल गयी…

अब तो करो… दूर अँधेरा… सुबह नयी…

अब तो करो… दूर अँधेरा… सुबह नयी…

 

-प्रवीण

12 Comments

  1. Ashu says:

    राम नाम सत्य, होने के बाद जगना क्या…
    हर सबूत नष्ट, होने पे भगना क्या…

    …………………….
    यही सत्यता है आज के व्यवस्था की…
    वास्तविकता का चित्रण करती ये कृति मन को भा गयी…

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @Ashu, आज-कल के जो हालात हैं…कभी-कभी पता नहीं क्यूँ…अपने आप ही ऐसे विषयों की ओर रुख़ हो जाता है…हालाँकि ज़्यादातर मैं सकारात्मक रचनाओं पर ही ध्यान केन्द्रित करना चाहता हूँ…

      फिर भी ये जानकर अच्छा लगा कि आपको पसंद आई… 🙂

  2. Vishvnand says:

    वास्तव सारी बात बता कर
    अपने ढंग से सुन्दर न्यारे
    जगा दिए हैं तुमने सब के
    दिल में बसे जो मोहन प्यारे
    छक्के छूटेंगे इन सबके
    जाग गए हैं मोहन प्यारे

    अति सुन्दर और सटीक
    अर्थपूर्ण मनभावन रचना
    हार्दिक बधाई

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @Vishvnand, वाह दादा…आपकी इस सुन्दर छुटकी प्यार भरी रचना और प्रशंसा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद… 🙂

      ऐसे ही प्रोत्साहक शब्दों से ही तो रचनाकार का reserve में आया हुआ fuel tank फ़ुल हो जाता है… 🙂

  3. siddha nath singh says:

    विद्रोही मन की विप्लावक पुकार,कविता का अनगढ़पन उसकी सुन्दरता का प्रतिमान.

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @siddha nath singh, बहुत-बहुत धन्यवाद् जी…मेरी पुकार सरकार तक पहुँचे न पहुँचे लेकिन हमारे जागरूक रचनाकारों तक तो अवश्य ही पहुँच गयी है…और यहीं से इस सुधार की धारा बहना शुरू होती है… 🙂

  4. dp says:

    sir ji, anhoniyon kii bhor na ho to hi achchha… 😉

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @dp, अनहोनियों की भोर होना अच्छा है…अनहोनियों से भरी भोर होना अच्छा नहीं… 🙂

      और आपके आँख मारते हुए नटखट से smiley एवं त्वरित कमेन्ट के लिए धन्यवाद्… 🙂

  5. anju singh says:

    क्या आप कभी कोई ऐसी रचना भी लिखते हो जिसे हम कह सके की इसमें कुछ कमी रह गई…

    बहुत बहुत बढ़िया.. रचना.

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @anju singh, अंजू जी, क्यूँ शर्मिंदा कर रही हैं…इतनी तारीफ़ भी अच्छी नहीं…अधिक मीठा (प्रशंसा) खाने से diabetes हो जाती है… 🙂

      कभी-कभी एक-आध करेला (सुधार/सुझाव) भी खिला दिया कीजिये… 🙂

  6. rajiv srivastava says:

    aaj ke prajatantra par aachia sateek waar—na jane mohan pyare kab jaagenge

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @rajiv srivastava, हम लोगों को जगाना होगा…एक-एक क़दम से ही कारवाँ बनाना होगा… 🙂

      बहुत-बहुत धन्यवाद जी… 🙂

Leave a Reply