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“रेल” का सन्देश

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Hindi Poetry

(My Pencil Live Sketching Artwork at Bhopal Railway Station on 1-01-2011.) 

 

“रेल” जीवन की

 

रेल के इंतज़ार में, बैठे हैं किरदार कई…

कोई किसी के बूढ़े बाबा, कोई है बूढ़ी माई…

चेहरे सबके अलग-अलग हैं, कई भावों से युक्त…

कोई अपने आँसू है छुपाता, कोई चिंता से मुक्त…

 

मानव रचित यह कलाकृति, लगती है जीवन की अनुकृति…

जीवन में भी होते सुख-दुःख, रेल चलती स्टेशन रुक-रुक…

अच्छे-बुरे सब साथ लेकर, यात्री से ना लेती परिचय…

फिर हम क्यूँ सकुचाते हैं, जीवन में मित्र बनाते समय?

 

दिखलाती वो सबको मंज़िल, चाहे हो जाती हो देर…

अंधियारे से हम क्यूँ डरते, होती उसकी भी तो सबेर…

चलने का देती सन्देश, हिमाचल हो या मध्यप्रदेश…

भारत के हों या बाहर के, पहुँचाती सबको स्वदेश…

 

रेल से सीखो आगे बढ़ना, लक्ष्य बनाकर चलते रहना…

मंज़िल आनी ही आनी है, चाहे मौसम हो कोई…

भाईचारा ऐसा रखती, ज़ात-पात को कभी ना सुनती…

सबको अपने दिल में बसाकर, चलती रहती कभी न रुकती…

 

-प्रवीण

8 Comments

  1. Vishvnand says:

    रेल पर रची सुन्दर रचना
    बढ़िया बहुत कल्पना भावना
    सच गुण ऐसे सबको संभालना
    रेल मंत्री को नहीं, भारतीय रेल को वन्दना

    सुन्दर प्यारी रचना के लिए हार्दिक commends

    आप तो sketching में भी उस्ताद हैं. बहुत सुन्दर .
    यह जान कर भी बहुत खुशी अनुभव कर रहा हूँ . जीते रहो

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @Vishvnand, आपके सुन्दर शब्दों के लिए बहुत आभारी हूँ दादा…और ये तो आप बड़ों का ही आशीर्वाद है जो कुछ भी मैं कर पाता हूँ… 🙂

      बस अपना आशीष इसी प्रकार सदैव बनाए रखियेगा… 🙂

  2. rajivsrivastava says:

    ati sunder sandeshpradh rachna badahai

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @rajivsrivastava, प्रशंसा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद् राजीव जी… 🙂

      जानकार ख़ुशी हुई कि आपको पसंद आई… 🙂

  3. gargi says:

    वाकई बहुत ही सुन्दर चित्रकारी कर लेते है आप…
    यह देख बेहद ख़ुशी हुई… और रचना के बारे में क्या कहें…
    बहुत ही अलग विषय उठाया हाउ आपने….
    पढ़ते ही ऐसा लगा जैसे वहीं हु….

    हार्दिक अभिनन्दन…!

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @gargi, हाँ विषय थोड़ा अलग था, लेकिन रेल को देखकर sketching करते-करते कब शब्दों की रेल चल गयी पता ही नहीं चला… 🙂

      शुभकामनाओं एवं प्रशंसा के लिए आपका आभारी हूँ… 🙂

  4. anju singh says:

    waah sir waah …
    क्या बात है मैंने तो आप की इस, सुन्दर रचना की तारीफ कर रही थी …
    पर मैंने देखा की इस, बोलते चित्र की सुन्दरता भी कुछ कम नहीं थी …

    माफ़ी चाहती हूँ इतनी सुदर कविता इतने देर से पढने के लिए…

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @anju singh, आपका तारीफ़ करने का ये अनोखा अंदाज़ भी हमें पसंद आया…

      नव-वर्ष की पहली सुबह ही रेलवे-स्टेशन पर बनाया था यह चित्र…

      अब लग रहा है कि मेरी दोनों ही रचनायें सफल रहीं…

      बहुत-बहुत धन्यवाद… 🙂

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