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p4poetry “इक बगिया”

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Hindi Poetry
 

 

जब p4p पे आते हम, सब दुःख-दर्द भुला देते…
समाँ कवियों का बंधा है ऐसा, कि घंटों चुटकी में बिता देते…
आओ करवाते हैं परिचय, इस बगिया के माली का…
जिन्होंने सींचा इस बगिया को, महक रही जो पुष्प सहित…
 
रेनू जी की पैनी आँखें, और राज जी हैं व्यस्त कहीं…
विकास भाई के प्रहार सटीक, प्रीती जी तो दिखती नहीं…
विश्वनंद दादा की समझायिश, तो अंजू जी की अधूरी ख्वाहिश…
परमिंदर जी करती हैं प्रेरित, तो हरीश जी कर देते मोहित…
 
नीरज जी के अनमोल वचन, अश्विनी जी लिखते हो मगन…
चलाते सुशील जी कोमेडी गन, सिद्धनाथ जी भी नहीं हैं कम…
नितिन भाई भी धाँसू हैं, सीमा जी जिज्ञासु हैं…
उल्हास जी भी दिग्गज हैं, कक्कड़ जी लहराए ध्वज हैं…
 
किशन, संकेत गुजराती भाई, स्वयं प्रभा जी हैं मन भायीं…
शकील जी की शायरी निराली, सरना व सहाय जी रस की प्याली…
राजीव जी की मर्मस्पर्शी रचना, फर्गस जी क्यूँ हैं Gion Gion…
आशु जी क्यूँ बने हैं पापी, विभोर जी क्यूँ माँगें माफ़ी…
 
सुधा, विभा, वर्तिका, संगीता, सोनल व मेधिनी जी…हैं इस बगिया के फूल…
dp जी की क्या है फ़ुल फ़ॉर्म, नहीं है जिनका नाम यहाँ वो भी हैं कूल…
वेद जी क्यूँ हुए व्यथित, सुलझाएँगे हम सारी गुत्थियाँ कथित…
प्रयास किया लेने का सबको, बना सुन्दर यात्रा-वृत्तांत…
 
1-1 रचना लिख हुए कुछ मस्त, ऐसों से सब कवि हैं त्रस्त…
कोई लिखता आकाश-पाताल, कुछ की भाषा ही बेहाल…
पल-पल, घंटे, फिर रात-दिन, करते-करते कब बीते दो साल…
लगता है जैसे देखा था इक सपना, और हुआ हो वो साकार…
 
डॉक्टर सारे ज़बरदस्त हैं, शौक़ से लिखते सभी मस्त हैं…
आशा है गार्गी जी लिखें कुछ नया, और p4p बनाए रखे हम सबपे दया…
p4p से मिलता कितना प्यार, सबसे अच्छा मिले व्यवहार…
यह मंच बन गया अपना सा, बस महके ये बगिया और परिवार…
 
– प्रवीण 

22 Comments

  1. Gargi says:

    अरे वाह! प्रवीणजी… बहुत खूब…
    आपने तो यहाँ सबका सुन्दर परिचय दे दिया..
    बहुत ही जीवंत लिखा है आपने यह पद्य…

    बहुत बहुत बधाई…..

    इस रंगबिरंगी बगिया में शामिल होने का गर्व लगता है मुझे..

    और हाँ.. अंत में अपने मुझे भी शामिल कर लिया..?
    आपकी उम्मीदों को पूरा कर पाऊँगी की नहीं पता नहीं पर कोशिष ज़रूर करुँगी…

    ગુજરાતી છું… કઇક ગુજરાતી પણ કહીશ…

    કહેવું હતું કાઈ કેટલું ને આવી ગઈ હું પળમાં…
    કથાનો, કાવ્યો કંડારાઈ ગયા શબ્દોના પ્રાંગણમાં…

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @Gargi, बहुत-बहुत धन्यवाद…और यह जानकर ख़ुशी हुई कि मेरा यह प्रयास आपको अच्छा लगा… 🙂

      और आप ज़रूर बहुत अच्छा लिख सकेंगी…ऐसा मेरा विश्वास है… 🙂

  2. anju singh says:

    वाह जी वाह… दिल खुश हो गया.. बेहद खुबसूरत पंक्तियों के साथ परिचय दिया है आप ने इस p4p की इस हरी भरी बगिया की… और हा, अपने आप को भी इस बगिया मैं शामिल देखकर भी बेहद ख़ुशी हुई है…

    सोच रही हूँ, क्या ना कहूँ और क्या तारीफ करूँ …
    आप की इस खुबसूरत कविता की क्या दात दूँ…
    हो मेरे पास अगर शुभकामनायों का अम्बर तो
    तो वो भी आज मै इस कविता पर वार दूँ….

    बहुत बहुत बढ़िया सर जी…
    .

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @anju singh, अरे भई, आपको तो शामिल करना ही था…आप भी तो इस p4p बगिया का ही फूल हैं ना… 🙂

      तारीफ़ के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया जी… 🙂

  3. anju singh says:

    वाह जी वाह… दिल खुश हो गया.. बेहद खुबसूरत पंक्तियों के साथ परिचय दिया है आप ने इस p4p की इस हरी भरी बगिया ka… और हा, अपने आप को भी इस बगिया मैं शामिल देखकर भी बेहद ख़ुशी हुई है…

    सोच रही हूँ, क्या ना कहूँ और क्या तारीफ करूँ …
    आप की इस खुबसूरत कविता की क्या दात दूँ…
    हो मेरे पास अगर शुभकामनायों का अम्बर तो…
    वो भी आज मै इस कविता or aap पर वार दूँ….

    बहुत बहुत बढ़िया सर जी…

  4. Vishvnand says:

    p4p बगिया की रचना अति सुन्दर मन भायी है
    प्रवीण आपका प्रयास सुन्दर बगिया ये बहु प्यारी है
    पढ़कर सबकी नवीन प्यारी रचनाएँ मन भाती हैं
    उनपर कमेन्ट और rating देना उन्नति पथ दिखलाती है
    खुद पर इसका असर बड़ा है कविता सूझत जाती हैं
    इसीलिये ऐ मेम्बर प्यारों पढो प्यार से कवितायें
    देते जाओ कमेन्ट और rating जिसकी कवि राहें देखें
    और करो कविता की पोस्टिंग इक इक जो मन में उभरें …..
    प्रवीण की सुन्दर कविता का अर्थ ये मन में आया है
    इस बगिया को शोभित रखना सब का कार्य ये प्यारा है ….

    प्रवीण …प्यारी हार्दिक बधाईयाँ

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @Vishvnand, वाह दादा वाह…आपने तो एक बार फिर कमाल की पंक्तियाँ लिख दीं… 🙂

      दादा आप तो p4p के बरगद हो…आपकी छाँव में ही तो ये बगिया फल-फूल रही है…आप जितना जागरूक माली इस मंच पर और कोई नहीं… 🙂

      मेरा प्रयास साकार करने के लिए हृदय से धन्यवाद… 🙂

  5. rajivsrivastava says:

    badahai Praveen ji!
    Aap ne apni is rachna ke madhyam se sabhi ka maan badaya hai
    yaha lagta har koi apna hai ,nahi koi paraya hai.
    jisne bhi is mandir main apne kadam rakhe hai
    usne dhero pyar paya hai,sach hue uske sapne hai

    ati sunder rachna badahai

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @rajivsrivastava, बहुत-बहुत धन्यवाद जी… 🙂

      आप सभी लोगों का प्रभाव ही तो है…जो ये रचना बन पड़ी है… 🙂

      और इस रचना का सारा श्रेय भी में p4p बगिया के मालियों (संस्थापकों) के साथ-साथ, पुष्पों (कवियों) को भी देना चाहता हूँ… 🙂

  6. parminder says:

    इतनी सुन्दर रचना की बहुत बधाई! सच, पढ़कर खुद को भी बहुत गर्व महसूस होता है! यह site ही ऐसी है! और आपने तो बाखूबी सब का परिचय भी दे दिया! ईश्वर करे सब ऐसे ही यहाँ सुन्दर काव्य द्वारा सुन्दर भावनाओं को उपस्थित कर सब को प्रोत्साहित करें!

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @parminder, परमिंदर जी, चंद पंक्तियों में परिचय दे पाना बहुत मुश्किल काम था…फिर भी मेरा प्रयास आपको पसंद आया तो अच्छा लग रहा है… 🙂

      मेरी रचना को सफल बनाने के लिए आपका हृदय से आभारी हूँ… 🙂

  7. KasaK....Dil ki says:

    wahhhh pravin ji behad khubsurat abhiwyakti bhaawnaon ki,,sabke liye aapne jis pyaar ko darshaya hai wo kabile tareef hia…aur isse ye bhi saabit hota hai k aap sabki rachnaon ko kitna dhayn se padhte hain k unke vyaktitva k anusaar unhe apne shbdon me dhaal chuke hain…..
    iss behad uttam kalam ki kaarigari k liye aapko dheronnnn badhaiyan ji……behad pyaar bhara kalaam laga hume ye aapka……

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @KasaK….Dil ki, आपके सुन्दर शब्दों को दिल से महसूस कर सकता हूँ…आपने तो मुझे और भी सम्मानित कर दिया… 🙂

      कमाल के शब्दों में की गयी तारीफ़ के लिए तहेदिल से शुक्रिया आपका… 🙂

      आपके यही शब्द मेरे लिए प्रेरणास्रोत साबित होंगे… 🙂

      कभी न भुला सकेंगे, ऐ ज़िंदगी तेरा ये तोहफ़ा…
      कुछ अजनबी हमसाया बन गए कब पता भी न चला…
      सफ़र ये सुहाना चलता रहे ताउम्र…
      ना ग़म की हो धुप, रहे ख़ुशियों की छाँव सदा… 🙂

      • KasaK....Dil ki says:

        @P4PoetryP4Praveen,

        areee pravin ji aap humko sharminda kar arhe hain..aapne likha hi itna sunder hai k padhte padhte kab hum yelikh gaye hume pata hi na chala…bas beh se gaye the hum aapke shabdon ki lehron me…behad khubsurat sher keh diya hai aapne apne reply me ji…

        log mil jate hain yunhi kisi safar me
        aur aajate hain kareeb dil k apne aap
        hota hai unse kuch rishta beete janam ka
        isily chhod jaate hain dil pe ek anjaani chaap..!!!

        • P4PoetryP4Praveen says:

          @KasaK….Dil ki, वाह भई वाह! क्या बात है…और हमने भी तो सच ही बयाँ किया है… 🙂

          आपके ख़ूबसूरत “दिल पर छाप छोड़ते” शेर के लिए एक बार फिर से शुक्रगुज़ार हूँ… 🙂

  8. Harish Chandra Lohumi says:

    वाह वाह वाह !
    इस सम्मान के लिये हार्दिक आभार और धन्यवाद प्रवीण जी !
    p4poetry के p4पुष्पों से क्या माला p4पिरोयी है p4praveen जी ने ।
    हार्दिक बधाई !

    • P4PoetryP4Praveen says:

      @Harish Chandra Lohumi, इस मनभावन p4प्रशंसा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद हरीश जी… 🙂

      और आपका सदैव हृदय से स्वागत है… 🙂

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