« »

बहकावा

3 votes, average: 4.00 out of 53 votes, average: 4.00 out of 53 votes, average: 4.00 out of 53 votes, average: 4.00 out of 53 votes, average: 4.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

सन्नाटों में दम घुटने लगा है मेरा
अब जिंदगी में कोई तूफ़ान चाहिए ||
उजड़ता है तो उजड़ने दो चमन का समां
हर नयी बहार से पहले कहकशां चाहिए ||
उनकी तरफ “हम” का हाथ बढ़ाऊ भी तो कैसे
उन्हें तो हर लफ्ज में “मैं” चाहिए ||
कमज़र्फ ये दिल गुले गुलज़ार होता ही नहीं
अड़ा है इस बात पे, की रंगों-बू चाहिए ||
फुरकत के बहकावे में मत आ दोस्त
हर जलजले को पहले शक्ले-ख़ामोशी चाहिए ||

2 Comments

  1. Harish Chandra Lohumi says:

    अच्छी पन्क्तियाँ ! बधाई !

  2. Vishvnand says:

    बहुत बढ़िया अंदाज़ और खूबसूरत रचना
    हमारा तो मन कहता मिलना हर रोज पढ़ने
    ऐसी रचना चाहिए ……
    Commends for this beautiful poem

Leave a Reply