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“प्रण”

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Hindi Poetry, Jan 2011 Contest

“प्रण”

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जब कोई भी आहत होता या उन्नति हेतु उत्सुक होता,

या कोई प्रतियोगी होता या स्वभावतः भावुक होता,

या दुखद पारिवारिक-सामाजिक परिस्थितियों में होता !

चिंतित रहते रहते तब वह येन केन ही तत्पर होता !

तभी भावुकता में वह कुछ भी करने का लेता संकल्प,

खोजने में लग जाता वह तब कोई भी इसका विकल्प  !

इसीलिए वो कर लेता है कोई भी कठिन या सरल प्रण !

आशान्वित रहकर वो ताकता रहता सफलता का क्षण !

भीष्म पितामह, अर्जुन, दुर्योधन, रावण, राम, लक्ष्मण,

परसुराम, बाली, अंगद, सुग्रीव,हनुमान इसके उदाहरण,

जिनने किया नहीं कभी अपने प्रण के आगे कोई समर्पण !

आज के युग में है नहीं दृष्टिगत कोई भी ऐसा दृढ-प्रण,

क्यों कि लालच, लोभ, स्वार्थ से भरा पड़ा है जन-गण-मन !

अवसरवाद कर रहा है खंडित कोई भी किया हुआ प्रण,

जिसके आगे गौण है प्रण, जब होने लगे समर्पण-अर्पण,

चाहे हो रहा हो मुँह काला, कोई नहीं देख रहा दर्पण !

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14 Comments

  1. dp says:

    अब कहाँ रहे वो प्रण,
    सब छोड़ भाग गए रण 🙂

  2. Vishvnand says:

    विषय पर अतिसुन्दर अर्थपूर्ण रचना
    प्रशंसनीय
    “आज के युग में है नहीं दृष्टिगत कोई भी ऐसा दृढ-प्रण,
    क्यों कि लालच, लोभ, स्वार्थ से भरा पड़ा है जन-गण-मन !”
    चुनाव समय में वोटों खातिर नेता करते जो भी प्रण
    चालाकी इनकी है प्रण के बदले करते उलटे कर्म …..!
    प्रण करके उसे तोड़ते रहना बन गया इन दुष्टों का धर्म …

  3. Harish Chandra Lohumi says:

    अच्छी कविता ! ह्रदय-स्पर्शी कविता ! बधाई !!!

  4. Panch Ratan Harsh says:

    चाहे हो रहा हो मुँह काला, कोई नहीं देख रहा दर्पण
    झूठी चमक दमक पाने का कर रहा हर कोई “प्रण”
    गुरूजी ला जवाब कविता

  5. P4PoetryP4Praveen says:

    दादू, सही कहा आपने…लेकिन अगर हम सचमुच कुछ करने का प्रण कर लें तो फिर उसे कोई नहीं बदल सकता… 🙂

    वैसे p4p पर निरंतर लिखने, औरों की रचनाओं पर प्रतिक्रिया करने (हरीश जी से सहमत), और समाज के हित में अपने क़ीमती वक़्त से कुछ क्षण देने का प्रण उतना भी कठिन नहीं… 🙂

  6. renukakkar says:

    in the present scenario, there is no person who takes such a pledge as the the magnificent persons of olden times….these days pledges are taken by political parties before elections, promises are made and conveniently forgotten after the elections.
    nice poem though, i am no one to rate a person of your status but i give it a 5

  7. parminder says:

    चाहे हो रहा हो मुँह काला, कोई नहीं देख रहा दर्पण !
    वाह, क्या चित्रण किया है! जवाब नहीं! बधाई!

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