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प्रण – एक संकल्प !

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Hindi Poetry, Jan 2011 Contest

प्रण मानव की  भावना और उसकी मनः स्तिथि की उत्पति होता है ,

प्रण दिली ख्वाइश को सजीव करने का एक निर्णय होता है ,

प्रण दिशा प्रदान करता है और तय करता है कुछ मंजिले ,

कुछ प्रण निभाए जाते है ,तो कुछ बस लेकर भूला दिए जाते है!

कुछ लोग प्रण लेते है जिसमे समाहित होता है निजी स्वार्थ ,

कुछ लोगो का प्रण होता है जनकल्याण हेतु, निस्वार्थ  ,

कुछ प्रण दूषित और कलंकित कर देते है समाज ,

कुछ प्रण जगाते  है जनचेतना और दिलाते है स्वराज !

पूज्‍यनीय है प्रण मदर टेरेसा का जिन्होने असहाय को दिया सहारा ,

आदरणीय  है प्रण बापू का जिन्होने आज़ाद करवाया देश हमारा ,

अविस्मरणीय  है प्रण वीर जवानो का जिन्होने देश के लिए दे दी जान ,

आलौकिक  है प्रण नेहरू,शास्त्री का जिन्होने देश का बढ़ाया  मान ,

प्रशंसनीय  है प्रण भगत सिंह ,चंद्रशेखर  का जिन्होने धरती माँ  की रखी लाज ,

उत्कृष्ट  है प्रण लाल,बाल पाल का जिन्होने स्वाधीनता की लिए उठाई आवाज़ !

प्रण हो ऐसा जो दिलो की दूरियो को मिटा दे ,

प्रण हो ऐसा जो दुखियो पे खुशियो को लूटा दे ,

प्रण ऐसा हो जो बेघर को सर छुपाने की जगह दे ,

प्रण ऐसा हो जो देशद्रोहियों को गद्दारी की सज़ा दे,

ऐसे प्रण लेने वालो की संख्या बहुत ही कम हो गयी ,

इसी लिए तो आज हमारी धरती माँ भी बेबस हो गयी !

आज कल हर नये साल पर प्रण लेने का फॅशन है ,

सिगरेट छोड़नी है,या फिर वजन कम करने का टेन्षन है ,

कोई प्रण ले रहा औरो को हरा, सबसे ऊँचा ऊठ्ने का ,

तो कोई प्रण ले रहा फैशन कर, सबसे सुन्दर दिखने का ,

प्रण लेना ,और लोगो को बताना बन गयी एक ज़रूरत है ,

प्रण लेकर भूल जाना यह अब  इंसान की पूरानी फ़ितरत है ,

प्रण के पूरा होने से पहले ही उसके प्राण निकल जाते है,

इसीलये प्रण लेने वालो पे भी लोग कम विश्वास जताते है !

मैने भी अपने मन को टटोला है ,और अब मैं प्रण लेता हूँ ,

ऊँची ऊँची बात ना करू,ये औरो के लिए रहने देता हूँ ,

बस एक छोटा सा प्रण इस साल मुझे भी  लेना है ,

अपनी तनखवा का छोटा सा हिस्सा अनाथालय को देना है ,

यदि एक भी अनाथ बच्चे का भविष्य मेरे कारण सवर जाएगा ,

मैं अपने को धन्य मानूँगा ,मेरा जनम सफल हो जाएगा !

डॉक्टर राजीव श्रीवास्तवा


15 Comments

  1. kishan says:

    बहुत सुन्दर रचना बधाई राजीव भाई ,,,जय श्री कृष्ण

  2. rajivsrivastava says:

    jai sri krishna! kuch edit kar raha tha,aap ke tatkal comment ne chakit kar diya–bahut bahut dhanyavad

  3. Harish Chandra Lohumi says:

    शायद इस कमेन्ट का अवश्य इन्तज़ार रहा होगा आपको……
    आपने एक अनोखा प्रण लेकर इस मन्च पर शतक पूरा किया है राजीव जी !
    ह्रदय को स्पर्श करती हुई इस १०० वीं रचना का हार्दिक अभिनन्दन और शुभकामनाओं सहित बधाई !

  4. rajivsrivastava says:

    Harish ji! satak to aab poora hua jab aap ka yeh sneh bhara comment mila.bahut bahut dhanyavad !yah 100 rachnao ka safar poora na hota agar aap loga ka sneh pyar,wa prerna na prapt hoti— sada saath rahiyega–thanks

  5. siddha Nath Singh says:

    बहुत सुन्दर और प्रेरक पंक्तियाँ,वैसे भी प्रण लेना प्राण लेने से बेहतर है.

  6. rajiv srivastava says:

    sahirday dhanyavad sir

  7. Vishvnand says:

    अति उत्कृष्ट मनभावन अर्थपूर्ण रचना
    समझाती आज प्रण की कैसी होती जा रही है विटम्बना
    याद दिलाती अपने पुराने श्रेष्ट नेताओं के प्रण की भावना और कल्पना
    आज के नेताओं के प्रण तो बन गए हैं जनता पर मज़ाक का सुन्दर बहाना
    आपका प्रण बहुत अहम अर्थपूर्ण है, हम ने भी अब यह प्रण अपना माना है …

    रचना के प्रति स- ह्रदय अभिवादन और हार्दिक प्रशंसा …

    और हाँ, आपको p4poetry पर अपनी सुहानी poetry की एक masterly century के लिए बहुत खुशी से हार्दिक बधाई और असीम प्रगति की शुभकामनाएं …

  8. rajiv srivastava says:

    sahirday charansparsh sir,aap ki pratikriya ne mujhe bhavok kar diya hai–aap hi ka aasirwad hai jo main yaha tak pahuch paya— aap ke aasirwad ki sadey kamna karta hun sir ! dhanyavad

  9. P4PoetryP4Praveen says:

    रचना की लम्बाई ने इसकी ख़ूबसूरती काफ़ी कम कर दी है…और भाषागत सुधार भी अनिवार्यतः अपेक्षित हैं…और इस बार मैं कुछ नहीं बताऊंगा…आप खुद ही अपनी रचना को सतर्कता एवं ध्यानपूर्वक सुधारेंगे…इसी सुधार की प्रतीक्षा में… 🙂

    वैसे आपका प्रण अच्छा है राजीव भाई…किसी की ज़िंदगी रोशन कर जो सुकून मिलता है…उसकी कोई तुलना नहीं… 🙂

    • rajivsrivastava says:

      @P4PoetryP4Praveen, itne sunder comment ke liye dhanyavad .ye shirshak hi aisa tha ke apne aap ko rok na saka,isliye rachna kuch lambi ho gaye,.shayad kisi ko bahut aachi bhi lagi aur unhone 5 star bhi diye the,to ye to vayaktigat soch hai.aap sudhar ke liye hamesha prerit karte hai ,main sadev aap ka aabhari rahoonga—par kya karoo aap jaisa hindi ka gayata nahi hun isliye trutiyan ho jati hai ,hindi typing bhi nahi aati isliye typing mistake bvhi ho jati hai.—abhi main sheekh raha hun–aur aap jaise hindi ke jankaroo ka saath raha to jaldi hi sudhar kar loonga—bahuit bahut dhanyavad.

  10. rajivsrivastava says:

    I withdraw my entry from this contest.-judges please dont consider this post while judging—–sorry for inconvinience-thanks

  11. Gargi says:

    congrats rajivji… !

  12. parminder says:

    बहुत सुन्दर और बहुत-बहुत बधाई!! ऐसे ही प्रण काश हम सब भी लेने लग जाएँ!

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