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passion for poetry का क्या है मतलब?

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Hindi Poetry, Uncategorized

passion for poetry का क्या है मतलब ….?

p4p की साईट पर हमको प्यार बहुत है
अपनी रचनाओं पर हमको नाज़ बहुत है
हमको साईट पर पोस्ट करने का passion भी है
पोस्ट भी करते रहते इक इक रचना हम हैं ……

कर देते जब पोस्ट बाट तकें हम कमेन्ट की
जब ना आते कमेन्ट मन में रहे उदासी
कितनी देर लगाते भैया ये इनपर कमेन्ट करने की
जल्द कमेन्ट मिलने का यहाँ ना इन्तेजाम भी ….

जब आते कमेन्ट अच्छे हम तो काफी खुश हो जाते
जब न होते वो कुछ अच्छे उन मेम्बर पर रूठ भी जाते
Rating कोई दे देता तो उसपर कुछ हम ध्यान भी देते
अच्छे कमेन्ट देने वालों को शुक्रिया लिखना नहीं भूलते
औरों की रचना से है ना कोई वास्ता, ना पढ़ते ना कमेन्ट देते  …!

Poetry passion का यारों यही अर्थ क्या यही है मतलब?
औरों की काविता और उनपर कमेन्ट से हमें कोई न मतलब? …..

अच्छी बात हुई क्या यारों ऐसा करना?
औरों की रचना पर क्या हमें ध्यान न देना?
सब मेम्बर गर सोचें यारों ऐसा करना
share करने का क्या कोई फिर रहा मायना ?

ज़रा सोचिये अपनी duty का हर मेम्बर
मज़ा लीजिये सब की रचनाओं का सुन्दर
देते रहिये कमेन्ट rating रचनाएं पढ़कर
बन जाइए p4p पर असली passion वाले मेम्बर
और यूं करते रहिये p4p साईट का आदर
अपनी और औरों की रचनाओं का मिलकर ….

” विश्वनंद “

Just an idea & suggestion.
How about a self resolution by every author member that in the interest of his passion as also those of his other friends at p4poetry; for each of his poem posted for sharing he will read at least 5 poems of other members posted on that day or previous day, & rate each of them and comment on them on how he felt the poem….

13 Comments

  1. sonal says:

    p4p की साईट पर हमको प्यार बहुत है
    अपनी रचनाओं पर हमको नाज़ बहुत है !

    सर आपकी इन रचनाओं पर हमें भी नाज़ है !
    regards
    sonal.

    • Vishvnand says:

      @sonal
      कमेन्ट के लिए बहुत धन्यवाद,
      आशा है तुम भी इस पोस्टिंग में विदित किये नुसार जब भी हो सके औरों की रचनाये मजे से पढ़ उनपर अपनी Rating और कमेन्ट जरूर देती रहना…

  2. siddha nath singh says:

    कविता ऐसी हो जो पाठक के मुंह से वाह वाह निकाल दे तो क्यों न प्रतिक्रिया दी जाएगी.फिर अकबर इलाहाबादी का शेर भी ध्यान में रखें-
    तहसीन के काबिल तेरा हर शे’र है अकबर,
    अहबाब करें बज़्म में अब वाह कहाँ तक,
    इसी का एक दूसरा मज़ेदार शे’र भी याद आ गया सुन लीजिये-
    कुछ सनअतो हिर्फत की तरक्की भी है लाजिम
    आखिर ये गवर्मिंट से तनख्वाह कहाँ तक.

    • Vishvnand says:

      @siddha nath singh
      वाह वाह निकलती है
      जब पाठक खुद को और खुद की कविताओं को भूल
      दूसरे कवि की कविता और भावनाओं में खो जाता है
      तब कविता के minor दोषों का उतना ध्यान नही आता
      कविता का मजा ज्यादा आता है .

      कमेन्ट में critical appreciation करना होता है, याने बताना क्या अच्छा था पहले और क्या ठीक नहीं था बाद में, जिससे author को उत्साह और दिशा तथा गल्तियाँ सुधारने सहायता मिले.

      समझना कि मेरी कविता वाह वाह के काबिल है और अन्यों की अक्सर उतनी नही ये भी कुछ उचित बात नहीं है. यहाँ हर कविता वाह वाह के लिए ही नहीं पर मार्ग दर्शन के लिए भी पोस्ट की जाती हैं. यह तो ” Passion for Poetry” वालों का मंच है, बड़े बड़े प्रसिद्ध हो गए कविओं के interest का उतना शायद नहीं गर उन्हें नयों को सही मार्गदर्शन करने में रूचि न हो…

      इस पोस्टिंग में मेरा उदेश्य कवि और वाचकों को सिर्फ खुद की रचनाओं पर ही नही बल्कि अन्य की रचनाओं पर भी अपने कमेन्ट/विचार और rating देने के लिए प्रवृत करना है जो इस p4poetry मंच का इक बढ़िया feature है और सब मेम्बरों के हाथ है. इसमें इजाफा करने की सख्त जरूरत है…

      आपके कमेन्ट से लगा कि मैं मेरी रचना का भावार्थ समझाने में असफल था….

  3. rajivsrivastava says:

    aap jayada der is site se door nahi rah sakte,ye apni aur kheech hi leta hai—-ye p4poetry ka passion hi to hai.——–good one sir congrats

    • Vishvnand says:

      @rajivsrivastava
      आपका कमेन्ट बहुत अच्छा लगा है पढ़कर,
      यूं ही औरों की कविताओं पर कमेन्ट , rating देकर और अपनी कविता इक इक पोस्ट कर
      छाये रहना है आपको और हम सब को अपनी इस प्यारी p4poetry पर ….

  4. Harish Chandra Lohumi says:

    बहुत ही गम्भीर और विचारणीय विषय पर लेखनी चलायी है सर ! हार्दिक बधाई और अभिवादन इस सन्देशप्रद रचना का !
    बात वास्तव में सोचने वाली है- यदि कोई कवि काव्य-पाठ कर रहा हो और श्रोता खामोश बैठे हों तो कवि क्या खुद को कवि कह पायेगा ? इससे भी अधिक सोचने वाली बात यह है कि इस आदरणीय मन्च पर कवि ही “कवि” है और कवि ही श्रोता/पाठक/वाचक होते हैं । यह जरूरी नहीं कि हर एक रचना पर “वाह” निकलने के बाद ही प्रतिक्रिया दी जाय आखिर हम सभी लोग इस मन्च पर पारिवारिक सदस्यों की तरह जुड़े होते हैं । यदि किसी रचना पर “आह” भी निकले तो भी तो जाहिर करना चाहिये ना ! और यह तो बिलकुल सत्य है कि कोई भी एक कमेन्ट किसी भी एक कवि को राह दिखा सकता है या उसके मनोबल को बढाने में सहायक सिद्ध हो सकता है । कविता यदि एक पौधा है तो उस पर आने वाली प्रतिक्रियाएँ “पुष्प” कही जा सकती हैं, जिनके फ़ूलने का इन्तज़ार हर कवि को होता है।
    इस मार्गदर्शक प्रस्तुति का हार्दिक सम्मान !

    • Vishvnand says:

      @Harish Chandra Lohumi
      प्रतिक्रिया के लिए आपको हार्दिक धन्यवाद ….
      आपने कहा वह बिलकुल सही है,

      हर कोई author जो अपनी कविता पोस्ट कर यहाँ share करता है वह जानना चाहता है कि वाचक को उसकी रचना कैसी लगी/जँची l रचना के बारे में वाचक की feeling क्या है.l और वाचक को चाहिए कि वो अपने कमेन्ट में कविता का Critical appreciation करे. हो सके तो क्या अच्छा है और क्या त्रुटियाँ लगीं ये बताये..
      सिर्फ वाह वाह चाहिए ऐसा कदापि नहीं है और वाह वाह नही कह सकते तो कमेन्ट न देना ये और भी उचित नही है. कविता का overall दर्जा कैसा लगा ये तो Star Rating में दे सकते हैं, वो भी author के लिए बहुत जरूरी रहता है.
      ऐसा गर ज्यादातर वाचक न करें तो यहाँ रचनाओं की sharing का मतलब ही क्या है

      इसीलिये हर वाचक को जितना बन सके औरों की रचना पढ़ उसपर अपनी rating और कमेन्ट देना Passion for poetry के लिए उतना ही महत्त्व का है जितना कि अपनी खुद की रचनाएँ पोस्ट करना……

      इस विषय पर वाचकों की प्रतिक्रियाएं जरूर चाहूँगा….

      • Vishvnand says:

        Just an idea & suggestion.
        How about a self resolution by every author member that in the interest of his passion as also those of his other friends at p4poetry; for each of his poem posted for sharing he will read at least 5 poems of other members posted on that day or previous day, & rate each of them and comment on them on how he felt the poem….

  5. P4PoetryP4Praveen says:

    दादा, आपने तो दुखती रग पर हाथ रख दिया है…सच कहा आपने…रचना का उद्देश्य बिना प्रतिक्रिया जाने कभी सफल नहीं हो सकता…और यहाँ तो कोई भी अपनी सुविधानुसार कभी भी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकता है…

    क्या पहले के समय में ऐसे कवि-मंच की कोई कल्पना भी कर सकता था? नहीं….और जब इतना सुन्दर सौभाग्य हमें प्राप्त हुआ है तो हमें अपने प्रतिक्रिया देने के कर्तव्य का भी ईमानदारी से पालन करना चाहिए…

    वैसे अगर कोई रचनाकार सिर्फ़ रचना likhne पर dhyan deta है तो uska bahishkar kiya jana चाहिए…use प्रतिक्रिया na dekar…yani uski रचना तो padho lekin use batao mat कि kaisi lagi…fir wo khud hi sudhar jayega… 🙂 क्या khalay है दादा?

    And congrats for this sensible step and creation Dada … 🙂

    • Vishvnand says:

      @P4PoetryP4Praveen
      आपकी बहुत अर्थपूर्ण प्रतिक्रिया का हार्दिक स्वागत. काश अन्य मेम्बर्स भी इसे समझे और ध्यान में लें.

      बात ये है कि अपनी passion for poetry और p4poetry पर सुविधा के कारण पढी कविताओं पर rating and/or comment दिए बिना खुद पर ही अन्याय सा लगता है, चाहे वो authors दूसरों की कविता के बारे में अपनी duty निभा रहे हैं या नहीं.. आपका अपनी passion for poetry के प्रति रचनाओं में शब्दों के सुधार सुझाने के लिए प्रयत्न करना, कीमती समय देना इसकी एक प्रशंसनीय उदाहरणीय मिसाल है…

      इसलिए जो मेम्बर्स passion for poetry के प्रति अपनी duty किसी कारणवश नहीं निभा रहे उन्हें सीधी तरह समझ देना और देते रहना मुझे ज्यादा उचित लगता है, जो हमें शायद सदैव ध्यान में रखना पडेगा और प्रयत्नरत रहना पडेगा भले वो सुधरें या नहीं, ऐसा मेरा मानना है

      अर्थपूर्ण .कमेंट्स और rating का रचनाओं की तरह ही p4poetry पर वर्षाव हो यही हमारा उद्येश है

      शायद ये मसला फोरम पर भी उठाया जाना उपयुक्त हो जिससे मेम्बर्स अपनी बात कह सकें.. इस पोस्ट पर देखिये अभी तक तो responses इने गिने ही हैं.
      मैं यह रचना इंग्लिश में भी लिखने का प्रयास करने की सोच रहा हूँ…
      धन्यवाद. आपकी प्रतिक्रियाओं का इन्तेजार हमेशा रहता है…

    • dp says:

      @P4PoetryP4Praveen, बात में दम है प्रवीन जी ! नेक ख़याल है . आगे जोड़ना चाहूंगा – यदि उसकी रचना पर कमेन्ट दे भी दें तो उसमें यह लिखना कदापि न भूलें कि अन्य कवियों की रचनाओं पर उसके उदासीन रवैये के कारण उसकी अच्छी रचना भी उदासीन लग रही है . यदि वास्तव में कवि-हृदय होगा तो झनझना उठेगा और सोचने के लिए मजबूर होगा . और यदि चिकना घड़ा निकला, तब तो कुछ भी नहीं किया जा सकता . 🙂

      • P4PoetryP4Praveen says:

        @dp, कवि हृदय हम पिघल से जाते, कोई करे बुरा फिर भी ना आँख उठाते हैं…
        लिखते जाते पल-पल जो महसूस किया, कहाँ किसी की प्रतिक्रिया की राह देख रुक पाते हैं? 🙂

        आपकी बातों से पूर्णतः सहमत हूँ… 🙂

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