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अब तो जागो!

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Hindi Poetry

कौन देख रहा है
हमारे बहते आंसू
लहूलुहान मन
और तन
जिस पर
करते आये हैं
प्रहार
जाने कितने लोग
सदियाँ गुजर गयीं
पीड़ाएँ भोगती रहीं
हमारी पीढियां
हमने
फल दिए
फूल दिए
और दीं
तमाम औषधियां
फिर भी
हम रहे
उपेक्षित
पीढित
अपने ही घर में
अपनों के ही बीच
अब तो जागो-
हे कर्णधारो!
क्योंकि
हम बचेंगे
तो बचेगा
धरा पर
जल और जीवन.

4 Comments

  1. Harish Chandra Lohumi says:

    बहुत अच्छी रचना अबनीश जी, बधाई !!!

    वृक्षारोपण कार्य महान,
    जंगल देते जीवनदान,
    चार वृक्ष तुम जहां लगाओ,
    चारों धाम वहां पर पाओ .

  2. pallawi says:

    bohut achchi rachna pasand aayi!!

  3. Vishvnand says:

    सुन्दर रचना
    पर्यावरण रक्षण पर
    अर्थपूर्ण मनभावन और प्रभावी
    sharing के लिए धन्यवाद और बधाई

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