« »

शहीद वीरों के परिजन,अब भी झोंपड़ो में ही सोते है…….

3 votes, average: 4.00 out of 53 votes, average: 4.00 out of 53 votes, average: 4.00 out of 53 votes, average: 4.00 out of 53 votes, average: 4.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

सत्ता में अपनी तूती,

बजाता है हर कोई,

बदल जाती है किस्मत,

जो होती है सोई, 

‘अशोक’चक्र  पर आंच,

 तो ‘पृथ्वी’ का बोझ बढे,

सत्ता के ठेकेदारों ने,

किये कैसे ‘आदर्श’ खड़े,

‘नारायण’ के हाथों से,

डोर सत्ता की छुटे जाती है,

‘भुज’ में ‘बल’ चाहे जितना हो,

कुर्सी ‘अजित’ नहीं होती है,

‘अमिट’ नहीं है छबि उनकी भी,

जो सत्ता सुख और ‘विलास’ भोग रहे,

बिनती करते होंगे वे भी,

सदियों तक ‘भ्रष्टाचार’ का रोग रहे,

बेशर्म अफसर और सत्ताधारी,

भ्रष्टाचार के नाले में हाथ धोते है,

शहीद वीरों के परिजन,

अब भी झोंपड़ो में ही सोते है…….

 

 

13 Comments

  1. rajiv srivastava says:

    kya baat hai!ek dum sach yahi to ho raha hai.
    shahido ke prijano ko bhio nahi baksha–sach much aise logo se ghirna ho rahi hai .bahut sunder rachna badahai

  2. really, the Aadarsh Soceity Scam of Mumbai is a testament to this fact.
    nice poem

  3. nitin_shukla14 says:

    बहुत ही खूबसूरत रचना है यह
    कुछ शब्दों/नामों का प्रयोग आपने बहुत ही खूबसूरती से किया है

  4. Abhishek Khare says:

    आपकी ये रचना पैसो के लालची और अपनी इंसानियत बेंच चुके आजकल के नेताओं के मुह पर एक तमाचा है | बहुत खूब कहा है आपने पालीवाल जी |
    कुछ मेरी तरफ से भी |

    “आदर्श” नहीं है एक अकेला इन नेताओं का भष्टाचार
    इनने कितने घर निगले है लम्बी है एक लिस्ट अपार
    वीरों की विधवाओं का जो हिस्सा खा गए टोपीदार
    उनको मारो बीच सड़क में लेजाकर के जूते चार

  5. Vishvnand says:

    वाह, रचना बहुत सुन्दर
    अपने आप में अलग सी
    व्यंगपूर्ण और मार्मिक, ह्रदय झकझोरती भी
    ऐसी अर्थपूर्ण रचना के लिए हार्दिक बधाई

  6. vibha mishra says:

    अच्छी रचना …….बधाई है सर

  7. Ravi Rajbhar says:

    Apke sach kahne ki kimmat ko naman.
    bhawporn rachna ke liye badhai.

Leave a Reply


Fatal error: Exception thrown without a stack frame in Unknown on line 0