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मौन!!

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Anthology 2013 Entries, Crowned Poem, Hindi Poetry

तुम्हारी चीख ,द्वन्द, कोलाहल
मेरी चीख ,द्वन्द ,कोलाहल
बैठे हम पास मौन !!!!

बँटवारा कमरों का
बँटवारा दिलों का
आँगन का बूढ़ा पेड़ मौन !!

प्रयत्न मेरा
प्रयत्न तुम्हारा
बंद दिल के दरवाजे मौन!!

 हँसते ठहाके
फैलता व्यापार
दरवाजे पर पड़ी चप्पलें मौन !!!

बढते रिश्तें
पनपती कोपलें
सिकुड़ता जड़ मौन!!

तुम्हारा साथ ,उसका साथ
सबका साथ
मै अकेली मौन !!!

जाती पूरी
धर्म पूरा
अधूरी इंसानियत मौन !!

20 Comments

  1. Harish Chandra Lohumi says:

    अच्छी रचना !

  2. Abhishek Khare says:

    बहुत ही सुन्दर और अर्थपूर्ण रचना | बधाई |

  3. Vishvnand says:

    बहुत कुछ कहता हुआ मौन
    सुन्दर अभिव्यक्ति की मनभावन रचना
    हार्दिक बधाई I

  4. nitin_shukla14 says:

    Pallavi Bahut hee saar poorna hai yeh

  5. dr.vedvyathit says:

    सुंदर रचना सुद्देश्य पूर्ण
    बधाई

  6. neeraj guru says:

    पल्लवी मैंने तुम्हारी यह पहली कविता पढ़ी है और कहना चाहता हूँ कि यह कविता तुमने नहीं लिखी है वरन यह तुम्हारे द्वारा प्रगट भर हुई है.सही अर्थों में यह भावाव्यक्ति है पूर्णतः काव्यमय.साथ ही प्रस्तुतिकरण भी बेहतर है.

  7. Ruchi_Misra says:

    Bahut hi sunder pratutikaran maun ka..

  8. Priyankar says:

    Nice One!!But i wont be mum about this

  9. parminder says:

    शोरगुल भरे माहौल का यह मौन बहुत ही उत्कृष्ट रचना के रूप में आपने प्रस्तुत किया है| अति सुन्दर!

  10. soumya says:

    heart touching poem ..reflecting the problem of different aspects of life keep writing..

  11. pallawi says:

    heartly thanx for appriciation…
    n thnx for reading ……….

  12. soumya says:

    why are you mum ?? keep writing..
    we are waiting for your new poems 🙂

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