« »

“एक दिन” आया

3 votes, average: 4.67 out of 53 votes, average: 4.67 out of 53 votes, average: 4.67 out of 53 votes, average: 4.67 out of 53 votes, average: 4.67 out of 5
Loading...
Crowned Poem, Oct 2010 Contest
विभावरी-तम के गवाक्ष से,
रजत-सदृश नव आशाओं के दीप जलाने – “एक दिन” आया |
 
निशि-अंचल से जाग,
अंशुमाली बिखेरने – “एक दिन” आया |
 
वसुंधरा को पुलकित करने,
जीव-जगत को जाग्रत करने,
मन-मानस ज्योतिर्मय करने – “एक दिन” आया |
 
“एक दिन” बीता कल होयेगा, 
बीत गया तो पछतायेगा |
कर ले प्रण कुछ कर जायेगा, 
“एक दिन” सफल बना जायेगा |
 
अधिक नहीं कुछ-कुछ कर ले तू,
पल-पल मोती सा चुन ले तू |
नव-जीवन की माला बन जा,
मानव-हित पर अर्पित कर जा |
 
असहायों का संबल बन जा,
भूखे शिशु का आँचल बन जा |
अंधियारे में कर उजियारा,
प्यास बुझा बन अमृत-धारा |
 
पर-पीड़ा को अपना ले तू,
सुख-वर्षा झर बरसा दे तू |
अकिंचन को अंक लगा ले,
आज धरित्री स्वर्ग बना दे |
 
जग में दीप प्रज्ज्वलित करके,
सौरभ-सुमन प्रवाहित करके,  
सकल भुवन में बिखरा जा तू,
जीवन अर्पण करता जा तू |
 
“एक दिन” स्वर्णिम हो जायेगा,  
सिन्दूरी-संध्या लायेगा |
नव “एक दिन” बन, फिर आने को,
निशि-अंचल में छिप जायेगा |
 
(रूचि मिश्रा)
 
 

13 Comments

  1. rajiv srivastava says:

    kya baat hai,har insaan me ek din ki cahat hoti hai–wo din jo waisa hi ho jaisa wo chahata hai–good one

  2. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर रचना
    आनंददायी उत्साहवर्धक विचार और मनभावन .
    हार्दिक बधाई

    नव “एक दिन” बन, फिर आने को,
    निशि-अंचल में छिप जायेगा | … उत्कृष्ट अंतिम पंक्तियाँ..

  3. Dhirendra Misra says:

    Very nice and remarkable.

  4. parminder says:

    क्या खूब लिखा है! बहुत सुन्दर विचार, सुन्दर शब्द, सुन्दर प्रस्तुति!

  5. nitin_shukla14 says:

    atyadhik sundra prastuti
    Kaash hum sab aisa utkrisht jeevan jee payen, to moksh prapti ke leye tanik bhee prayas nahee karne padenge

  6. vibha mishra says:

    commendable ,beautifully written

  7. medhini says:

    Congratulations, the winner.

  8. Sangeeta Mundhra says:

    Badhaai! Atyant hi utkrushtha rachana – behad sundar bhavaabhivyakti aur prastuti tatha atyant hi uccha vichardhara!

Leave a Reply