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मुक्तक

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जिन्दगी छोटी बहुत लगती रही अक्सर मुझे
यह शिकायत ही हमेशा क्यों रही अक्सर मुझे
जिन्दगी छोटी कहाँ थी एक लम्बा वक्त थी
पर बहुत ही कम लगी ये जिन्दगी अक्सर मुझे

कोई आशा या निराशा ही चलती जिन्दगी
कल्पना का रथ लिए ही दौड़ती है जिन्दगी
चाल कब इस कहाँ पर ठहर जाये एक दम
यह कभी भी कब बताती है यहाँ पर जिन्दगी

जिन्दगी मेरी मुझी से जाने क्यों नाराज थी
मान जाती बात मेरी जो बहुत आसन थी
पर उसे उस के अहं ने सिर झुकाने न दिया
बात तो आसन थी पर जिन्दगी की बात थी

दूर से आवाज दी तो पास वो आई नही
जब गया नजदीक तो वो भाग कर आई नही
क्या पता किस सोच में यूं ही खड़ी है गुमसुम
जिन्दगी की ये नजाकत खुद उसे भाई नहीं

नाम कितने रख लिए तूने बता ओ जिन्दगी
रूप कितने धर लिए तूने बता ओ जिन्दगी
पर अधूरा सा रहा है जिन्दगी का कैनवस
रंग भर कर भी अधूरी क्यों रही है जिन्दगी

दूरियां मिट जाएँगी सब जिन्दगी की डोर से
नजदीकियां बन जाएँगी सब जिन्दगी की डोर से
डोर कच्ची है यदि तो बहुत पक्की जिन्दगी
जिन्दगी बंध जाएगी जब जिन्दगी की डोर से

जमाने की हवा को छूने चली है जिन्दगी
कुछ नये से बहाने गढने लगी है जिन्दगी
कुल मिला कर बस यही है जिन्दगी की दास्ताँ
और क्या इस से अधिक बाक़ी रही है जिन्दगी

जिन्दगी को देख लोगे तुम यदि नजदीक से
तब समझ आएगी तुम को जिन्दगी ये ठीक से
पर इसे तुम फैंसला मत मान लेना आखिरी
दूर रहती जिन्दगी है जिन्दगी की सीख से

जिन्दगी को छू लिया तो एक सिरहन सी हुई
आँख भर देखा तो उस में एक त्द्फं सी हुई
बस इसी के सहारे ये जिन्दगी चलती रही
और एक पल में इसी से जन्दगी पूरी हुई

एक दिल के लिए कितने दूसरे दिल तोडती
एक दिल के लिए अपने सिर से पत्थर तोडती
पर यदि टूटे यही दिल सोच कर देखो जरा
छोडती फिर जिन्दगी क्या सारे नाते तोडती

9 Comments

  1. neeraj guru says:

    सभी मुक्तक ज़िन्दगी की तरह रोचकता लिए हुए हैं,पर अधिक लम्बाई के कारण कहीं-कहीं ले भी टूटती है,जो एक पाठ में बाधक बनती है.

  2. बहुत ही सुंदर मुक्तक ,जिंदगी के हर रंग से परिपूर्ण है

  3. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर, गहन , मनभावन
    नीरज जी के कमेन्ट से सहमति

    जिन्दगी की बात मुक्तक कर रहे सुन्दर सही
    फिर भी कैसे ये कहूँ कि समझ आयी जिन्दगी ….

  4. dp says:

    वास्तव में एक “मुक्तक” ही है जिन्दगी .

    एक बात जानना चाहूंगा सर जी-
    “ये पूरी रचना एक मुक्तक है या,
    इस रचना में कई मुक्तक हैं . “

    • dr. ved vyathit says:

      @dp, बन्धु आप का हार्दिक आभारी हूँ
      जिन्दगी विषय पर सभी मुक्तक अलग २ रचना हैं
      ये तो थोड़े से ही लिखे हैं अभी तो ऐसे बहुत से यहाँ पोस्ट नही क्र पाया हूँ
      जिन्दगी के अबी तो बहुत से रंग बाकि हैं
      पुन आभार

  5. rajiv srivastava says:

    KITNE AACHE HAI SIR, BAHUT HI SUNDER AUR SADHI HYE RACHNA BADAHAI

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