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***नजर नहीं आता….***

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Hindi Poetry

तीर चलते हैं मगर  तरकश नजर नहीं आता

चाहत में निगाहों को सफर नजर नहीं आता

 

अंजाम जान के भी पलकों  में घर बनाते हैं

दिल टूटने का उन्हें हश्र नजर नहीं आता

 

आसमान को छूने की तमन्ना करने वालो  

क्यों जमीन पे टूटा पर नजर नहीं आता

 

लगा दिया इल्जाम बेवफाई का उनके सर

उनकी आँख से टूटा अश्क नजर नहीं आता

 

जिस तकिये पे मिलके गुजारी थी रातें

उस भीगे तकिये का दर्द नजर नहीं आता

 

सुशील सरना

14 Comments

  1. dp says:

    gazab !!!!!!!!!!

  2. Vishvnand says:

    वाह . बहुत खूब, बधाई
    आपके ख्यालों का अंदाज़ बखूब निराला है
    आसमान से तकिये तक दिखा दिया
    जो हमें नज़र नहीं आता …

    • sushil sarna says:

      @Vishvnand,
      आपकी इस प्रशंसा का हार्दिक शुक्रिया-आपका हर शब्द हमारे लिए ऊर्जा का स्त्रोत है- धन्यवाद

  3. sonal says:

    A nice write Sir.

  4. neeraj guru says:

    शानदार अभिव्यक्ति

    • sushil sarna says:

      @neeraj guru,
      आपकी इस ऊर्जावान प्रतिक्रिया का हार्दिक शुक्रिया नीरज जी

  5. dr. ved vyathit says:

    बहुत सुंदर
    हार्दिक बधाई

  6. kishan says:

    nice sir sa gaye aap bas yuhi likhte rahe humari ashaye aur pyaar aap ke sath hain

  7. parminder says:

    वाह-वाह! तारीफ बहुत है करने का मन, पर कोई शब्द नज़र नहीं आता!

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