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जल-बूंदों से लो आज भिगोने आया

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Crowned Poem, Sep 2010 Contest
जलधि से उठा जलद बन कर, नभतल पर छाया |
जल-बूंदों से लो आज भिगोने आया |
 
नभ गुंजन के साथ मधुर है, यह बादल का नाद |   
छिटकता एक अनन्त प्रकाश, संग है बूंदों की बारात |
सुहाना मौसम आया, 
जल-बूंदों से लो आज भिगोने आया |
 
कुहू – कुहू पीयू – पीयू, कूँके कोयल बोले मयूर |
बादल की सुनकर गरर – गर्र, दादुर भी बोले टर्र – टर्र  |
धरा पर मंगल छाया,  
जल-बूंदों से लो आज भिगोने आया |
 
पर्वत झूमे नदियाँ झूमी,  झूमी – झूमी मदमस्त पवन |
किसलय भी झूमे भ्रमर संग, छा गयी धरा पर नव उमंग |
प्रकृति पर यौवन छाया,       
जल-बूंदों से लो आज भिगोने आया |
 
हर्षित मन है हर्षित तन है, प्यासी धरा पुनः लो आज मगन है |
क्षिति-जल का है प्रेम,  अनोखा यह बंधन है – बूंदों का फिर आज धरा से आलिंगन है |
जल-बूंदों ने अपना सर्वस्व लुटाया,  
जल-बूंदों से लो आज भिगोने आया |
 
सज गयी धरा सज गया चमन, सज गया प्रकृति का अंग – अंग |
कण – कण में लहरी एक तरंग, बिखरा धरती पर प्रेम रंग |
नव-श्रृंगार नव-रूप धर आया,     
जल-बूंदों से लो आज भिगोने आया |
 
(धीरेन्द्र मिश्रा)

30 Comments

  1. rajivsrivastava says:

    bahut sunder aur manbhavan rachna—shabdo ka sahi tana -bana–welcome to p4poetry

  2. amit478874 says:

    Nice one..! I think your poem has enough potentiality to be nominated for Top 5 in September contest..! & Might win the contest…! All the best…!

  3. nitin_shukla14 says:

    Sir Ji Kahan Chupe the…..aur aaye to chha gaye…..
    Kya baat hai, i am giving 5 out of 5
    Its a lovely Creation…
    Congrats ….

  4. Harish Chandra Lohumi says:

    वास्तव में काव्य नव-श्रृंगार नव-रूप धर आया !!!
    बधाई !!!

  5. Ruchi says:

    Really appealing..

  6. nitin_shukla14 says:

    आपकी यह कविता कई बार पढ़ी मैंने, और यह याद करने की कोशिश की, कि ये पंक्तियाँ मुझे क्या याद दिलातीं हैं
    मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं अपने स्कूल कि दिनों में वापस लौट आया हूँ और क्लास में बैठकर अपनी पाठ्य पुस्तक से किसी उत्कृष्ट कवि की रचना पढ़ रहा हूँ
    बहुत ही शुद्ध और सुन्दर शब्दों का प्रयोग किया है आपने
    पुनः बधाई

  7. vibha mishra says:

    aapki lekhni ne to varsha ritu ki tarah man ko bhigo diya………………….sarahniya srijan kiya hai aapne ………badhai mishra ji

  8. parminder says:

    बहुत ही मन भाई आपकी यह कविता! वाकई लगता था जैसे अत्यंत जानी पहचानी हो! भीग गए पूर्ण रूप से बारिश के रंगों में!
    जीत की बहुत-बहुत मुबारक!

  9. nitin_shukla14 says:

    Dhirendra bahut-Bahut Badhaiyan….
    aap yun hee likhten rahen, yeh hamari kamana hai……

  10. rajivsrivastava says:

    bahut bahut badahai

  11. Harish Chandra Lohumi says:

    रचना के पुरस्कृत होने की हार्दिक शुभकामनाएँ धीरेन्द्र जी !!!

  12. Sangeeta Mundhra says:

    Badhaii! Itni utkarsh rachana hai ki prashansaa ke liye shabd bhi kam hain.

  13. sushil sarna says:

    Many many congratulatio on winning the poem-no doubt this poem deserves-it is a lovely poem with deep expresssions.-badhaaee

  14. himabindu says:

    ur poem is just fantastical.simply superb writing …..congratulations and all the very best for future writing…………

  15. vibha mishra says:

    congratulations mishra ji 4 ur success

  16. sanjana jain says:

    this poem realli touched mah heart sir…….

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