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यादें

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Hindi Poetry
मधुर – मधुर मधुमय सी हैं,
कहते – कहते चुप सी हैं,
  
ये यादें जो दुखमय हैं,
ये यादें जो सुखमय हैं,
  
यादों की पहचान कहाँ,
दिल में है पर नाम कहाँ, 
 
 याद करो तो पाओगे,
अपनी हैं, अनजान कहाँ…….
 
  
                                (रूचि मिश्रा)

12 Comments

  1. shakeel says:

    रूचि जी
    शायद आपकी कोई रचना मैं अब तक अपनी कमनसीबी से न पढ़ सका था मेरी पहली दाद कुबूल कीजिये आप बहुत बेहतरीन कविता कहतीं हैं और अंदाज़ आपके लिखने का उर भी खुबसूरत सा है.

  2. siddha Nath Singh says:

    aap ne bachchan ji ki kavita ki yaad dila di,
    kya bhulun kya yaad karun main
    aganit avsadon ke kshan hain
    aganit unmadon ke kshan hain
    kya bhulun kya yaad karun main.
    badhayi leejiye.

  3. renu rakheja says:

    कहते कहते चुप सी हैं- बहुत खूब

  4. prachi sandeep singla says:

    itz nice 🙂

  5. ANUJ SRIVASTAVA says:

    nice poem,…

  6. Abhijit Shukla says:

    bahut खूबसूरत पंक्तियाँ :
    यादों की पहचान कहाँ,
    दिल में है पर नाम कहाँ,

    Badhaiyaan

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