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प्यार और कविता की किस्मत एक जुदाई में है रोना

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Hindi Poetry

( सिद्धनाथजी और उनके जज्बातों में पिरोने उन्हें समर्पित एक सुर यह भी)  
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दाद बहुत हैं पर नाकाफी दिल की बातें दिल ही जाने
अन्दर जो एक दिल रोता है उसको कोई तो पहचाने
बहलाने को शेर बहुत हैं पर दिल में जो बादल घुमड़े
कभी लिखाया जिसने बरसे उसपर भी तो दिल यह माने
कसक मचलती तरस-तरसकर बूँद एक आंसू की आए
बसा हुआ जो कविताओं में उसको भी तो कुछ तरसाए
अजब बड़ा यह दिल का रोना मिल जाएं तो आग रहे ना
प्यार और कविता की किस्मत एक जुदाई में है रोना
बाहर जीवन का उजाड़ है यादों की सूखी हरियाली
भरा-भरा दिल लगे मगर सच पूछो गर तो  खाली-खाली

3 Comments

  1. siddha Nath Singh says:

    धन्यवाद , आप की सुन्दर भाव भरी पंक्तियों के लिए, वास्तव में आप दिल की पहचान और कविता का विवेक रखते हैं, कलम के धनी और कलाम के गौरव हैं.

  2. prachi sandeep singla says:

    veryy nice,,siddhanath ji truly deserves dis 🙂

  3. pabitraprem says:

    Thanks siddhajee . A lot also to Pracheejee.

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