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तब तुम्हें,तुम्हारे बहाने

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Hindi Poetry

कल्पनाओं में हूबहू तैरते शब्द
बहक जाते हैं
कलम तक आते-आते
बहुत मुश्किल उन्हें थामना

जैसे
सोचतीं कुछ और
करतीं कुछ और
बहक उठतीं तुम

बहुत मुश्किल होता
तब तुम्हें,
तुम्हारे बहाने
खुद के दिल को संभालना

न बहकतीं
तो
न बहकते शब्द

न होता रूठना
न होता मनाना    
बसना कलम में
और कविताओं में रहा आना

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One Comment

  1. prachi sandeep singla says:

    awesome 🙂 beautiful

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