« »

खरबों खरब तारिकाओं के बीच

1 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

खरबों खरब तारिकाओं के बीच

होंगी अरबों अरब

पृथ्वियां.

 

पृथ्वियों के बीच हमारी भी

छह अरब की एक पृथ्वी

और

इस पृथ्वी में हर की एक

यानी छह अरब दुनियाएं.

 

जैसी उसकी

वैसी मेरी भी एक दुनिया है

दिल जहां पहुंचाता

वहाँ तक.

 

जोहानसबर्ग और पेरिस तक नहीं पहुंचा

नहीं पहुंचा यह

लन्दन न्यूयार्क या पीकिंग तक

मास्को तो क्या

लद्दाख तक भी नहीं.

 

फेरे लगाए गणपति महाराज की तरह

चूहे पर सवार

पहुंचा तो उस तक

थम गया कोलंबस की तरह

वहीं रम गया.

 

नहीं होंगे हम

तो

नहीं होगी हमारी दुनिया भी

उड़ा ले जायेगी साँस

खरबों खरब की सैर पर.

 

सोचता पर मैं इस वक्त

थमा

कि उसकी दुनिया कितनी बड़ी ?

भटकती वह भी होगी कहाँ ?

कितनी ज़गह दी उसने मुझे वहाँ ?

 

One Comment

  1. Vishvnand says:

    वाह, क्या बात है
    बहुत भटके हो
    और भटका रहे हो हमें भी
    यहाँ वहां, जाने कहाँ ….

Leave a Reply