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माँ-बेटा

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Hindi Poetry

“बेटा! मत रो.
आँसू बहुत कीमती होते हैं.

“माँ! तुम झूठी हो.
अगर सच में मेरे आँसू कीमती हैं
तो इन्हें बेच क्यों नहीं खरीद लेती कुछ रोटियाँ?
फिर तुम और मुनिया चैन से खा सकोगी.

“अच्छा? मैं और मुनिया खा लेंगे
और तू नहीं?

“माँ! तुम बेवकूफ़ हो.
अगर मैं खा लूँगा तो रो कैसे पाऊँगा?

9 Comments

  1. Vishvnand says:

    वाह बहुत खूब .
    भूख और अश्रु पर एक व्यंग, एक पहेली सी और एक बहुत गहरा ह्रदयस्पर्शी कटाक्ष
    stunning
    kudos

  2. rachana says:

    beautiful imagery..loved the impression!

  3. Raj says:

    Liked it.

  4. kishan says:

    nice vikash bhai realy nice

  5. Ek_Musafir says:

    wonderful

  6. siddha Nath Singh says:

    vyangya ki maar kaisi hoti hai ye kavita ek sashakt udaharan hai.

  7. prachi sandeep singla says:

    too touching

  8. Chandan says:

    Waah vikash jee waah!

  9. parminder says:

    क्या कटाक्ष है! भूख और दर्द का रिश्ता तो हमेशा ही रहा है|

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