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उस एक पल न जाने क्या हुआ

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Hindi Poetry

उस एक पल न जाने क्या हुआ
दिमाग मेरी जेब में था
जुबान फिसली
शब्दों के साथ दिल भी गया.

वहीं अटका पड़ा मैं तब से
साँस निकल चली
पर
निकाला न गया.

दोनों न रहे
न दिल, न दिमाग
पर तब बेदिल मैं नहीं
कोई और आया रहा.

4 Comments

  1. Harish C.Lohumi says:

    सही फरमाया आपने,
    पल भर में न जाने क्या से क्या हो जाता है.

    बधाई !!!

  2. Parespeare says:

    lovely poem Sir

  3. kishan says:

    nice acha he andaz aap ka sir!!!!!

  4. Vishvnand says:

    बहुत अच्छे
    पढ़कर मज़ा आ गया .
    जो कुछ हुआ
    अच्छे के लिए ही हुआ
    यही मेरा मशवरा रहा …

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