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यह कविता

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Hindi Poetry

 

यह कविता उनके लिए

मज़ा आता रहा

जिन्हें सताने में

औरों के बहाने अपने को I

 

यह कविता उनके लिए

लाचारी को छिपाया किये जो

हँसी में

देखते मुझे आईने की तरह I

 

यह कविता

उस अविश्वाश के लिए

जो

मेरा विश्वाश है I

 

 

 

यह कविता

उस दुःख के लिए

जो

केवल मेरा अपना है I

 

यह कविता

उस खुशी के लिए

जो मैं खिला सका

किसी के होठों पर I

 

यह कविता

उस एक दिन के लिए

जन्मा जब कोई

किसी के मरने को तिल-तिल I

 

यह कविता

उस शव के लिए

जो पड़ा है निश्चल सामने

प्रार्थना की तरह I  

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6 Comments

  1. Vishvnand says:

    अति सुन्दर अंदाज़ और रचना भी
    बहुत मनभावन, हार्दिक बधाई …

    यह कविता
    उस कविता जैसी
    जिसका शायद मुझे
    बड़ा इंतज़ार था …

  2. Harish Chandra Lohumi says:

    यह इंतज़ार उस इंतज़ार सा,
    जिस तरह “यह कविता” को,
    आपकी लेखनी का रहा हो,
    हमारी आँखों से होकर ,
    दिल में बस जाने का.

    मनभावन !!!!! बधाई !!!

  3. Raj says:

    Different and strong.

  4. prachi sandeep singla says:

    काफी अलग सी लगी और अच्छी भी 🙂

  5. U.M.Sahai says:

    अच्छी रचना. विश्वाश की जगह विश्वास होना चाहिए था.

  6. pallawi verma says:

    bohut achchi hai aapki kavita!!

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