« »

सच है टूट-टूट हम भटके आवारा दिल को बहलाने

1 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

सच है टूट-टूट हम भटके आवारा दिल को बहलाने
पर तलाश में छिपा कौन बस इक मैं जानूँ इक तू जाने
चेहरे बहुत, बहुत से किस्से पर इक छिपी हकीकत थी
वह छबि लिए सदा भटका मन जिसमें उसकी चाहत थी
मिटा सभी बस एक खलिश प्यासी आँखों में बनी रही
चिबुक थाम अपलक छबि प्यारी देख निहारूं थकूं नहीं
जब अधीर हो मन चुपके से झांक मुझे तुम रोना
जहाँ छिपा मै सदा रहा मन का वह आकुल कोना

3 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर रचना
    बहुत सुन्दर भावनाएं
    हार्दिक बधाई

    जब अधीर हो मन चुपके से झांक मुझे तुम रोना
    जहाँ छिपा मै सदा रहा मन का वह आकुल कोना…. क्या बात है, अति सुन्दर

  2. siddha Nath Singh says:

    good one, one correction please it is khalish and not khalis.

  3. prachi sandeep singla says:

    veryyy touching 🙂

Leave a Reply