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अपने अश्कों में ही जले देखो.

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Hindi Poetry
कुछ हमारे  भी हौसले देखो. 
अपने अश्कों में ही जले देखो.
 
दायरे बस नज़र के हैं महदूद,
यूँ न  लम्बे थे  फासले देखो.
 
मुंह अँधेरे सफ़र पे निकले हैं,
किस जगह शाम अब ढले देखो.
 
कामयाबी नसीब हो किसको,
सब खड़े आसमां तले देखो.
 
हर्फ़ दर हर्फ़ वो ही अफसाना,
लहजे भर हैं जुदा भले देखो.
 
रहबरी का जूनून छोड़ो भी,
कुछ तो पांवों के आबले देखो.
 
हर नफ़स घुट रही है सीने में,
ज़िन्दगी यूँ  पड़ी गले देखो.

8 Comments

  1. Raj says:

    बहुत खूब.

  2. Vishvnand says:

    बहुत अच्छे,
    ये रचना आपकी भी कुछ अलग सी लगी, देखो …
    हार्दिक बधाई

  3. U.M.Sahai says:

    gazal umda hai, pasand aayi, badhai, S.N.

  4. prachi sandeep singla says:

    बेहतरीन 🙂

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