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मौन…..सुनो तो

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Hindi Poetry

हम जल कर हो गए राख
और तुम्हे अंगार तक न दिखा,
लपटों में भस्म हो गए सब अरमान
और तुम्हें धुंआ तक न दिखा?

ज़िंदगी तबाह कर दी चौखट पर तुम्हारी,
और तुम्हे अपना कोई सितम न दिखा|
नसीब अपना तुम्हारे जिम्मे था किया,
और पैरों की ठोकर से तुमने मिट्टी कर दिया?

सैकणों दृष्टिकोण जिनके विभिन्न कोण,
जूझते-जूझते बसर गयी यह ज़िंदगी,
मौन की आवाज़ शायद सुनाई दे तुम्हे कभी,
इसी उम्मीद पर आँखों से बयाँ किये दर्द सभी|

तुम तो दूर से ही तकते रहे हमेशा हमें,
और पास आने की ललक में हम फनाँ हो गए,
जुबां भी जैसे अकेला छोड़ गयी है हमें,
बस, यह शब्द ही हमारे मसीहा रह गए|

34 Comments

  1. Seema says:

    क्या बात है, बहुत खूब! भाव विभोर कर गयी आपकी कविता!

  2. rajdeep says:

    yes ma’am
    i agreed wid Seema
    liked it

  3. Raj says:

    बहुत सलीके से शब्दों में पिरोया ये दर्द. बहुत खूब.

  4. siddhanathsingh says:

    अच्छी लगी.

  5. alka says:

    very nice poem!

  6. prachi sandeep singla says:

    वाकई बहुत खूब,, 🙂

  7. Vishvnand says:

    अति सुन्दर भावनिक ह्रदयस्पर्शी रचना
    कैसी होती है मौन की आराधना में विवंचना
    इसकी दर्शाती गहन संवेदना …
    वैचारिक प्रशंसनीय रचना
    हार्दिक बधाई

    • parminder says:

      @Vishvnand, आपकी सराहना कविता से भी सुन्दर होती है, बहुत अभिनन्दन!

  8. vmjain says:

    एक बेहतरीन रचना. दर्द को आवाज़ दे दी आपने.

  9. U.M.Sahai says:

    बहुत ही सुंदर, भाव-प्रधान और दिल को छूने वाली कविता, परमिंदर जी. हार्दिक बधाई.

  10. rachana says:

    achchi kavita!

  11. sushil sarna says:

    कितनी पारदर्शी, कितनी मासूम, कितना सकून देने वाली होती है सृष्टी की अनमोल रचना- ओस की इक बूँद-पंखुड़ी पर गिरे तो शराब बन जाती है-कांटे पर गिरे तो एक दर्दीला एहसास बन जाती है-अंदर ही अंदर कांटे का तमाम दर्द पी जाती है औरों के लिए बस खुशी बिखेर जाती है- कुछ ऐसा ही एहसास मुझे इस रचना से हुआ है- दिल की गहराईयों को छूती प्यारी रचना-
    जिनकी खातिर हम तमाम उम्र पिघलते रहे
    वो हमारे जलने को इक अंदाज समझते रहे
    आपकी इस सुंदर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई परमिंदर जी

    • parminder says:

      @sushil sarna, इन शब्दों के सामने तो मैं कुछ बोलने लायक ही नहीं रही! बहुत खूब-बहुत खूब! और बहुत धन्यवाद भी!

  12. pallawi verma says:

    मौन की आवाज़ शायद सुनाई दे तुम्हे कभी,
    इसी उम्मीद पर आँखों से बयाँ किये दर्द सभी|
    bohut achchi, heart touching poem specially these lines!!

  13. c k goswami says:

    “मौन की आवाज शायद सुनायी दे तुम्हे कभी
    इसी उम्मीद पर आँखों से बयां किये दर्द सभी ………………”
    ——- बहुत खूब…बहुत खूब…..बहुत खूब ………..

  14. ashwini kumar goswami says:

    I can’t help dittoing the appreciations hereinabove ! Congrats !

  15. parminder says:

    सिद्ध जी, अल्का, प्राची, रचना, आप सब का तहे दिल से शुक्रिया!

  16. dr.o.p.billore says:

    रचना में प्राण फूकती ये पंक्तियाँ
    “मौन की आवाज़ शायद सुनाई दे तुम्हे कभी,
    इसी उम्मीद पर आँखों से बयाँ किये दर्द सभी |”
    उच्च कोटि की रचना देने के लिए आपका आभार एवं बधाई |

  17. Vinay says:

    मेरे दो शब्द ….. दिल से …. वाकई कमाल ….

  18. dr. ved vyathit says:

    क्यों इतना जलाते हो
    थोडा तो जरा ठहरो
    क्यों राख बनाते हो ||

    अपनों ने सुलगाया
    क्या खूब तमाशा है
    नजदीक में जो आया

    क्या २ न जलाएगी
    इस आग से मत खेलो
    ये मन को बुझाएगी

    सुंदर रचना
    शुभकामनायें

    • parminder says:

      @dr. ved vyathit, बहुत शुक्रिया वेद जी, आपकी सीख देती टिप्पणी का| अभी भी बहुत सीखना बाक़ी है! उम्मीद है प्रोत्साहन और मार्गदर्शन देते रहेंगे!

  19. Poonam Soni says:

    वाह क्या बात है..आप बहुत खूब लिखती हैं मैं खुशकिस्मत हूँ की मुझे यह पढने का मौका मिला.आप अपनी इन कविताओं को एक पुस्तक का रूप दीजिये. मुझे आज ही पता लगा की आप इतनी अछी कवियित्री हैं .

  20. parminder says:

    बहुत बहुत आभार! अपने को कभी भी कवियित्री नहीं सोच पायी, यह तो सिर्फ दिल में आये विचार हैं, कभी अपने कभी दूसरों की परिस्थितियों के, आप सब उत्साहना देते हैं तो आगे बढ़ जाते हैं!

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