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मेरी हर ख़ुशी की कारण थी तुम

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Hindi Poetry

ख्वाब में आती थी मेरे, कहने बस इतनी सी बात,
अब नहीं हूँ मैं तुम्हारी, मान लो बस तुम ये बात,
सोचा करता तुम हो झूटी, ख्वाब भी लगते थे झूठ,
आँख जब खुली मेरी, जब ख्वाब वो गया था टूट,
तुम्हारे इस ख्वाब पे मुस्कुराए थे हम,
क्यूंकि मेरी हर ख़ुशी की कारण थी तुम,

रोज़ अपने ख़्वाबों का महल खडा करते थे हम,
और अपने पाँव से कुचलके चल देती थी तुम,
मैं तुम्हारी जीत को अपनी जीत समझता,
और मेरी हार पे मुस्कुराती थी तुम,
तुम्हारी उस मुस्कान पे मुस्कुराए थे हम,
क्यूंकि मेरी हर ख़ुशी की कारण थी तुम,

हम थे तुम्हारे सामने खुले किताब की तरह,
तुमने जो चाह उसपे लिख दिया,
हमने चाहा था उसपे अपनी ज़िन्दगी लिखना,
तुमने हमारे मौत का फरमान लिख दिया,
तुम्हारे इस फरमान पे मुस्कुराए थे हम,
क्यूंकि मेरी हर ख़ुशी की कारण थी तुम,

हम तो समझ रहे थे कि तुमसे प्यार कर रहे थे हम,
सच ये था कि अपने मौत का सामान जमा कर रहे थे हम,
तुम्हारी यादों को सीने से लगाके खुश हो रहे थे हम,
समझ न पाए कि जीते जी बेमौत मर रहे थे हम,
तुम्हारे इस क़त्ल-ऐ-आम पे मुस्कुराए थे हम,
क्यूंकि मेरी हर ख़ुशी की कारण थी तुम…..

14 Comments

  1. prachi sandeep singla says:

    good one 🙂 bas झूट को झूठ कर लीजिये plz

  2. Vishvnand says:

    बहुत अच्छे, बहुत खूबसूरत अंदाज़े – बयाँ
    मनभावन रचना, बधाई
    और इस सुन्दर कविता लिखने की मेरी खुशी का कारण भी हो तुम….

  3. sushil sarna says:

    मनोरम भाव और मनमोहक अंदाज-इस मनभावन रचना के लिए बधाई

  4. Anurag says:

    पहला और दूसरा अंतरा बहुत ही बढ़िया | भाव बखूबी निखारा है |

  5. brijesh chaurasiya says:

    AGAIN WOW HRIDAY JI …………..SHAYAD SACHHA PYAR HOTA HI KUCHH AISA HAI

  6. vpshukla says:

    sundar kavita,

  7. ashwini kumar goswami says:

    कविता के शीर्षक में तथा अन्यत्र भी “मेरे” के स्थान पर “मेरी” लिखना उचित
    होगा, क्यों कि “खुशी” शब्द स्त्रीलिंग है !

    • hriday says:

      @ashwini kumar goswami, शुक्रिया सर. मैंने पहले “मेरी” ही लिखा था पर लास्ट मोमेंट पे लगा शायद मैं गलत हूँ फिर बदल के “मेरे” किया. अब आपके कहने से यकीन हो गे की “मेरी” ही होगा. बहुत बहुत शुक्रिया मेरी गलती सुधारने के लिए.

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