« »

प्यार की परिभाषा

1 vote, average: 2.00 out of 51 vote, average: 2.00 out of 51 vote, average: 2.00 out of 51 vote, average: 2.00 out of 51 vote, average: 2.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

गुनेह्गारों की इस दुनिया में एक गुनाह हमने किया तो क्या बुरा किया,
प्यार तो सभी करते हैं , हमने किया तो क्या बुरा किया,
प्यार की परिभाषा उनसे क्या पूछते हो जिन्होंने इसे शब्दों से जाना,
परिभाषा तो उनसे पूछो जिन्होंने दोस्ती को ही प्यार माना…

10 Comments

  1. alka says:

    nice poem
    alka

  2. Vishvnand says:

    अच्छा ख्याल और अंदाज़ है
    मन भाया

  3. U.M.Sahai says:

    दोस्ती और प्यार दोनों अलग-अलग बात है, दोस्ती को प्यार समझ लेने पर बाद में पछताना पड़ सकता है.

  4. prachi sandeep singla says:

    cmpltly agree wid sahai ji

  5. parminder says:

    जी हाँ, कहीं दोस्तों से भी हाथ न धोना पड़ जाए 🙂
    सुन्दर कविता!

Leave a Reply