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तीन त्रिवेणी!

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Hindi Poetry

1. टुकड़ा-टुकड़ा बिका हूँ
धीमा-धीमा जला हूँ

कौन मुझे उधार में घर ले गया?

2. परछाई के पीछे का अँधेरा
गहरा, कोहरा आ के ठहरा!

एक रौशनी की चिनकारी भारी पड़ गयी!

3. बहार की छटा फूलो में यूँ लिपटी
मुस्कुराती मुझे सहला रही थी

कांटो की चुभन देर तक लगती है!

10 Comments

  1. santosh says:

    interesting lines! liked them!

  2. Ravi Rajbhar says:

    Wah,,,bahut khoob 🙂

  3. vmjain says:

    मज़ा आ गया पढ़ कर.

  4. Vishvnand says:

    बहुत खूब .
    तीसरी त्रिवेणी कमाल है , outstanding
    commends

  5. Seema says:

    Awesome expression of thoughts!!

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