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खाली रस्ता, खाली नज़र

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Hindi Poetry

तकते तकते राह तेरी
थक गयी अब तो मेरी नज़र
तन्हा सड़क पर, इंतज़ार में
बीती जा रही ये उम्र
उडती धूल की आहट पाकर
झूम उठती हूँ शामो सहर
कुछ पल के लिए ज़िन्दगी
जाती है मेरी ठहर
कौन है दूर वहां खड़ा
बेचैन होती मेरी नज़र
थम सी जाती दिल की धड़कन
न होती साँसों की भी खबर
ये क्या हुआ अचानक
कोई था ………
पर तुम न थे वहां
फिर से ढ़ा जाती कहर
दूर तक …………
खाली रास्ता , खाली नज़र

8 Comments

  1. U.M.Sahai says:

    किसी के इंतज़ार की बेचैनी को दर्शाती सुंदर रचना, नेहा, बधाई.

  2. Vishvnand says:

    A very beautiful poem indeed
    So picturesque as to feel as if seeing a video of the poem with the author.
    Commends

  3. ankur says:

    इस सुंदर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई …………………………

  4. pallawi says:

    bohut achchi rachna!!

  5. ruchi sharma says:

    नज़र सही दिशा में रखिये नेहा जी मंजिल भी मिल जाएगी ……….अच्छी रचना

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