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”मै निर्मोही ”

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Hindi Poetry

जब जब मेरे शब्दों ने ,
वाक्यों के अस्तित्व में
अपनी आखरी साँसे ली
तब तब पन्ने का सफ़ेद दामन
काली स्याही ने दागदार किया
शब्दों के अदृश्य घोड़े दौड़ते गये,
हर क्षण पंक्क्तियाँ मरती गयी
इस पंक्तियाँ से उस पंक्तियाँ
अपने अस्तित्व बचाने को दौडती गयी
लिखती गयी; खुद के बिखर जाने का दर्द
”मै निर्मोही” न समझ सकी
अब थक कर बैठी हूँ तो देखती हूँ
पन्ने का पूरा अस्तित्व ही काला है
पन्ने ने अपना अस्तित्व खो कर
शब्दों को अस्तित्व दिया है ;पर
”मै निर्मोही ” ही रही

18 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर सा मनभावन ख्याल
    आपकी कविता दर्शाने की कोशिश में है,
    इसके लिए आपको बहुत बधाई,
    पर कुछ शब्द गलत छपे हैं,
    कहीं कहीं कथन में भी संशोधन की जरूरत सी महसूस हो रही है,
    कृपया इसपर ध्यान देकर कविता जरूर edit करें

  2. dr.o.p.billore says:

    यदि शब्दों को वाक्यों में ढालना निर्मोही होना है ; तो बनी रहो निर्मोही |
    कोरे पन्ने को दागदार कर, शब्दों को उकेर कर, भावों को अस्तित्व में लाना यदि निर्मोही होना है तो बनी रहो तुम चिर निर्मोही |
    सुन्दर कल्पनाशीलता | बहुत बधाई |

  3. vmjain says:

    अच्छी कल्पना है. थोडा धोने – मांजने की ज़रुरत लगती है. कोशिश कीजिये.

  4. prachi says:

    great imagination,,loved it 🙂

  5. sushil sarna says:

    सुंदर कल्पना – सुंदर भाव- अच्छा प्रयास-थोड़ी एडिटिंग की जरूरत है – कोशिश जारी रखो पल्लवी

  6. vpshukla says:

    sundar bhav aur kalpana.

  7. parminder says:

    ऐसे निर्मोही बने रहने का मज़ा ही कुछ और है, बने रहिये ऐसे ही और लिखते रहिये ऐसे ही!

  8. Ravi Rajbhar says:

    wow,
    kamal ka likha hai pallawi ji….
    bahut-2 badhai aapko….aap student hai…kis field se.. yadi bura na lage to bataega. 🙂

  9. pallawi verma says:

    itne achche feedback k liye aapka bohut bohut dhanyabaad !!
    mai management ki student hu !!

  10. soumya says:

    really really good poem,for such a imagination you should be nirmohi…bni rho nirmohi

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