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मेरे नसीब से मुझको कोई गिला तो नहीं.

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Hindi Poetry

मेरे नसीब से मुझको कोई गिला तो नहीं.
सनम शरीक है मुझ में मगर मिला तो नहीं.
हसीन पल भी मेरी ज़िन्दगी में आये तो क्या.
मेरा वीरान सा गुलशन कभी खिला तो नहीं.
कोई बता दे, मुझे प्यार कहाँ मिलता है?
मेरी तलाश का थमता ये सिलसिला तो नहीं.
नादान दिल है, इसे ठोकरें ना लगने दो.
ये सिर्फ रेत का घर है, कोई किला तो नहीं.
सुकून-ए-ज़ुल्फ़ तेरा मुझको ना नसीब हुआ.
दो अश्क हो मेरी पलकों पे, ये सिला तो नहीं.

8 Comments

  1. U.M.Sahai says:

    वाह, बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है.

  2. Vishvnand says:

    सुन्दर, मनभावन, बधाई

    इन सारी बातों पर आपने
    ऐसी खूबसूरत नज़्म लिखी,
    किसी भी तराजू पर इस शायरी का,
    वजन कुछ कम तो नहीं ….!

  3. vmjain says:

    बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है. बहुत वज़नदार है.

    • शुक्रिया सर. इसी तरह मेरी रचनाओं के साथ बने रहिये. मुझे लिखने के लिए नई शक्ति मिलती रहेगी.

  4. prachi says:

    वाकई बहुत बढ़िया 🙂

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